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स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की रीढ़, तथ्यों को लोगों के सामने रखना मीडिया की जिम्मेदारी- मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना

सीजेआई एनवी रमना ने ‘गीता विज्ञान उपनिषद’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में भारत के मीडिया हाउस पर चर्चा की, इस दौरान उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारिता को लोकतंत्र की रीढ़ बताया…

नईदिल्ली (ए)। भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने  मंगलवार 26 जुलाई को गुलाब कोठारी की लिखी ‘गीता विज्ञान उपनिषद’ किताब का विमोचन किया. इस दौरान क जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तथ्यों को समाज के सामने पेश की जिम्मेदारी मीडिया हाउस की होती है. उनका कहना है कि हमारे देश और भारतीय समाज में लोग इसे ही सच मानते हैं।

‘गीता विज्ञान उपनिषद’ के विमोचन कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस एनवी रमना ने स्वतंत्र पत्रकारिता को लोकतंत्र की रीढ़ बताया. उन्होंने पत्रकारों को समाज का आंख और कान बताया. उन्होंने कहा कि यह मीडिया हाउस की जिम्मेदारी है कि वे तथ्य पेश करें. खासकर भारतीय सामाजिक परिदृश्य में जो कुछ भी छपा होता है लोग उसे सच मानते हैं।

ईमानदार पत्रकारिता पर ध्यान दें मीडिया हाउसbएनवी रमना ने कहा कि मीडिया हाउस को अपने प्रभाव और व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के बजाए ईमानदार पत्रकारिता पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने 1975 में आपातकाल के दिनों को याद करते हुए मीडिया की भूमिका पर बात की, उन्होंने कहा कि मीडिया घराने ही आपातकाल के काले दिनों में लोकतंत्र के लिए लड़ने में सक्षम थे।

 

सीजेआई ने पुराने दिनों को किया याद भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के अनुसार मीडिया हाउस की वास्तविक प्रकृति का निश्चित रूप से समय-समय पर आकलन किया जाना चाहिए. उन्होंने पत्रकार के रूप में अपने दिनों को याद करते हुए कहा कि वह समाचार कवरेज के लिए सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करते थे और जनहित की कहानियां करने के लिए उस दौरान पत्रकारों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होती थी।

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