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क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारत की बड़ी छलांग, पीएम मोदी ने की सराहना

क्यूएस रैंकिंग 2026 में आईआईटी दिल्ली भारत का सबसे शीर्ष रैंक वाला संस्थान बना है, जिसकी रैंकिंग 150वें स्थान से सुधरकर 123वें स्थान पर आ गई है। यह संस्थान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वहीं, पिछले साल का टॉप संस्थान आईआईटी बॉम्बे इस साल 118वें स्थान से खिसककर 129वें स्थान पर आ गया है…

 

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में भारतीय विश्वविद्यालयों की शानदार उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने इसे भारत की शिक्षा जगत के लिए उत्साहजनक और गर्व का क्षण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह रैंकिंग देश में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए लिखा, “क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 2026 रैंकिंग हमारे शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर आई है। हमारी सरकार भारत के युवाओं के हित में अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि इस साल कुल 54 भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान इस वैश्विक रैंकिंग में शामिल हुए हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। साल 2014 में केवल 11 संस्थान इस सूची में थे, और अब यह संख्या लगभग पांच गुना बढ़कर 54 हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए शिक्षा सुधारों और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कारण संभव हुआ है। क्यूएस रैंकिंग 2026 में आईआईटी दिल्ली भारत का सबसे शीर्ष रैंक वाला संस्थान बना है, जिसकी रैंकिंग 150वें स्थान से सुधरकर 123वें स्थान पर आ गई है। यह संस्थान का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। वहीं, पिछले साल का टॉप संस्थान आईआईटी बॉम्बे इस साल 118वें स्थान से खिसककर 129वें स्थान पर आ गया है।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने क्यूएस रैंकिंग में अपनी भागीदारी में 390% की वृद्धि दर्ज की है, जो G-20 देशों में सबसे तेज है। इस साल भारत के लगभग 48% विश्वविद्यालयों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। इतना ही नहीं, भारत के 5 संस्थानों ने वैश्विक टॉप 100 में भी अपनी जगह बनाई है, जो भारत की बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

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