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चीन की बढ़ती ताकत के सवाल पर पीएम मोदी ने जापानी मीडिया को दिया जवाब, कहा- भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार एवं प्रतिबद्ध है

पीएम मोदी ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हुए अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है…

नईदिल्ली (ए)। पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए जापान के दौरे पर गए हुए हैं. पीएम ने हिरोशिमा में कई देशों के नेताओं से मुलाकात की. दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन के सैन्य विस्तार के बीच पीएम मोदी ने शनिवार 20 मई को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देते हुए अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

पीएम ने जापान के अखबार ‘योमिउरी शिमबुन’ से एक इंटरव्यू में कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और गरिमा की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार एवं प्रतिबद्ध है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-चीन संबंधों का भविष्य केवल परस्पर सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों पर आधारित हो सकता है. भारत संप्रभुता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन के लिए खड़ा रहता है।

वैश्विक शांति के लिए भारत क्या करेगा? प्रधानमंत्री से जब पूछा गया कि प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता को लेकर उनकी क्या राय है और वैश्विक शांति एवं स्थिरता हासिल करने के लिए भारत उनके साथ कैसे काम करेगा, उन्होंने कहा कि दुनिया को कोविड-19 वैश्विक महामारी, आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे विकासशील देश असमान रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

“जी7 और जी20 शिखर सम्मेलन अहम मंच” पीएम मोदी ने कहा कि भारत इन चिंताओं को दूर करने को प्राथमिकता देता है और जापान एवं अन्य भागीदारों के सहयोग से मानव-केंद्रित विकास पर जोर देता है. उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य विभिन्न आवाजों के बीच एक पुल के रूप में काम करना और मानवता की बेहतरी के लिए साझा उद्देश्यों को प्राप्त करने पर केंद्रित रचनात्मक एजेंडे को बढ़ावा देना है. जी7 और जी20 शिखर सम्मेलन वैश्विक सहयोग के लिए अहम मंच हैं।

रूस-यूक्रेन जंग पर क्या कहा? यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर प्रधानमंत्री के विचारों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों पर मतदान से भारत के दूर रहने एवं रूस से तेल आयात में वृद्धि को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर भारत के रुख के बारे में पूछे जाने पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत विवादों को हल करने के लिए बातचीत एवं कूटनीति की वकालत करता है और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से प्रभावित लोगों की भलाई को प्राथमिकता देता है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आक्रमण की निंदा करने संबंधी संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों से दूर रहा, लेकिन वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. भारत यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है और संयुक्त राष्ट्र में और उससे भी परे रचनात्मक योगदान देने के लिए तैयार है।

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