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दो बच्चेदानी और दो योनि वाली युवती का हुआ सफल ऑपरेशन, बचपन से ही डायपर पहनना पड़ता था

युवती जन्म से ही इस समस्या से जूझ रही थी। पेशाब पर नियंत्रण न होने के कारण उसे बचपन से ही डायपर पहनना पड़ता था। समय के साथ, उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, और उसे पेट साफ न होने की समस्या भी होने लगी। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराने के बावजूद, उसे कोई राहत नहीं मिली। इस निराशाजनक स्थिति में, उसके परिवार ने लोहिया संस्थान में विशेषज्ञों से सलाह लेने का फैसला किया…

 

 

नईदिल्ली (ए)। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों ने एक एक दुर्लभ मामले में सर्जरी करके युवती को सामान्य जीवन दिया है। इस युवती के जन्म से ही दो बच्चेदानी और दो योनियां थीं। युवती का अपनी पेशाब पर नियंत्रण नहीं था और शौच का रास्ता भी अविकसित था। सर्जरी के बाद युवती सामान्य है। दावा है कि इस तरह का यह प्रदेश का पहला मामला है।

लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. ईश्वर राम धायल ने बताया कि बलिया निवासी इस युवती का जन्म से ही पेशाब पर नियंत्रण नहीं था। इसकी वजह से उसे बराबर डायपर पहनाया जाता था। उम्र बढ़ने पर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद उसे पेट साफ न होने की समस्या भी थी। स्थानीय स्तर पर दिखाने के बावजूद उसे कोई फायदा नहीं हुआ। ऐसे में घरवाले उसे लेकर लोहिया संस्थान आए। यहां हुई जांच में पता चला कि युवती को जन्म के समय से ही तीन समस्याएं हैं। युवती के दो बच्चेदानी और दो योनियां थीं। पेशाब की नलिकाएं गलत स्थान पर खुलीं थीं और गुदा मार्ग योनि के बेहद नजदीक था।

डॉ. ईश्वर राम घायल ने बताया कि जांच के बाद युवती का तीन चरण में ऑपरेशन करने का फैसला किया गया। पहले चरण में युवती के गुदा मार्ग को सर्जरी करके ठीक किया गया। इसके बाद पेशाब पर नियंत्रण लाने के लिए सर्जरी की गई। इसके बाद दो चरण में पेशाब पर नियंत्रण के लिए सर्जरी की गई। अब युवती सामान्य जीवन जी रही है। पेट संबंधी समस्या भी अब लगभग सामान्य है।

यह एक दुर्लभ स्थिति है जो जन्मजात होती है। कई लड़कियों को यूटेरस डिडेलफिस के बारे में तब तक पता नहीं चलता, जब तक कि उन्हें योनि में दर्द या असामान्य मासिक धर्म जैसी समस्याएं नहीं होती हैं। कुछ महिलाओं में, इस स्थिति के कोई लक्षण नहीं भी हो सकते हैं, और यह बिना किसी परेशानी के रह सकती है। लोहिया संस्थान में हुई यह सफल सर्जरी न केवल युवती के लिए जीवन बदल देने वाली साबित हुई, बल्कि चिकित्सा विज्ञान में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सर्जरी ने उन डॉक्टरों के समर्पण और विशेषज्ञता को उजागर किया, जिन्होंने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफलतापूर्वक संभाला।

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