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असम में मिलती है दुनिया की सबसे महंगी चाय, जानिए क्‍या है इसकी खासियत और कीमत ?

नईदिल्ली (ए)। भारत में चाय सिर्फ एक शब्‍द नहीं बल्कि इमोशन है, सुबह की शुरूआत से लेकर रात में दिन भर की थकान मिटाने तक चाय का सेवन एक आम बात है। यही कारण है कि भारत के लोग चाय को केवल एक पेय नहीं बल्कि एक जीवन शैली मानते हैं। 21 May को हर किसी के जीवन में चाय के महत्व को समझाने के लिए इंटरनेशनल टी डे मनाया जाता है। इसके अलावा यह दिन वैश्विक स्तर पर मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जो चाय उद्योग में सारी दुनिया में जाने जाते हैं।   इंटरनेशनल टी डे का महत्व इंटरनेशनल टी दिवस मनाने के पीछे का विचार इस वैश्विक पेय की मांग के बारे में जागरूकता पैदा करना है। चाय दुनिया में पानी के बाद पिया जाने वाले सबसे अधिक मात्रा वाला पेय है।

इस दिन चाय उगाने वाले समुदाय और निकाय कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं जो चाय के विकास के बारे में बात करते हैं जिसमें चाय उद्योग की वृद्धि, और अन्य समस्याओं जैसे कम वेतन, देखभाल, और खेत की साफ सफाई के बारे में बात होती है। यह दिन चाय के कुछ प्रसिद्ध प्रकारों जैसे ग्रीन, ब्‍लेक और हर्बल टी के स्वास्थ्य लाभों पर ध्‍यान केंद्रित करता है। 21 May को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस (international tea day 2021) बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, वियतनाम, इंडोनेशिया, केन्या, मलावी, मलेशिया, युगांडा, भारत और तंजानिया सहित कई देशों में मनाया जाता है।

यहां जाने चाय के 10 प्रकार जो वैश्विक स्‍तर पर उपयोग की जाती है।  

  1. कश्मीरी कहवा
  2. अदरक की चाय
  3. तुलसी की चाय
  4. सुलेमानी चाय
  5. रोंगा सा मसाला चाय
  6. लेमनग्रास चाय
  7. इलायची चाय
  8. नींबू चाय
  9. ग्रीन
  10. टी मक्खन चाय

असम में मिलती है दुनिया की सबसे महंगी चाय जानिए क्‍या है इसकी खासियत ?

दुनियां की सबसे महंगी चाय असम के बगानों में मिलती है जिसका नाम मनोहारी गोल्‍ड है। इस चाय की कीमत 50 हजार रूपए किलो है। 2020 में गुवाहाटी टी ऑक्‍शन सेंटर में इस चाय को 50 हजार रूपय में खरीदा गया है। इससे पहले 2019 में इस चाय की किस्‍म को 39 रूपये किलो बेचा गया था। इस चाय के महंगे होने की वजह यह इसकी पैदावारी है। दरअसल इस चाय को उगाना बेहद कठिन काम है। मई और जून में बिल्कुल सुबह इस चाय की पत्तियों को हाथ से बहुत सावधानी से चुना जाता है। यह बहुत मुलायम होती है।  दुनिया में असम, दार्जिलिंग और नीलगिरी में इस चाय की सबसे ज्यादा मांग रहती है।

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