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आसमान के बाद भारत की अब समुंद्र पर निगाह, मिशन समुद्रयान खंगालेगा पानी में छिपे राज

भारत के इस अभियान की वजह से समुद्र के इकोसिस्टम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि deep ocean mission पीएम नरेन्द्र मोदी के ब्लू इकोनामी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है…

नईदिल्ली (ए)। केंद्रीय अर्थ साइंस मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने सोमवार को एनआईओटी का दौरा किया और भारत के पहले मानव युक्त deep ocean mission पर अपडेट दी. उन्होंने सबमर्सिबल की समीक्षा की ओर माइक्रो ब्लॉगिंग साइट एक्स पर “मत्स्य 6000” की तस्वीर साझा की. यह एक पनडुब्बी है जिसके जरिए समुद्र की गहराइयों के रहस्य खोजे जायेंगे।

उन्होंने तस्वीर के साथ एक्स पर लिखा, “समुद्रयान मिशन के हिस्से के रूप में मत्स्य 6000 गहरे महासागरों की खोज की तैयारी में है. इसे चेन्नई में भारत सरकार के उपक्रम राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) ने विकसित किया है. चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब इसके जरिए महासागरों के इकोसिस्टम को परखने के लिए तीन लोगों का एक दल  समुद्र की गहराइयों में छह किमी नीचे उतरेगा।”

महासागरों के ईकोसिस्टम को प्रभावित नहीं करेगा अभियानबीमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के इस अभियान की वजह से समुद्र के इकोसिस्टम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि deep ocean mission पीएम नरेन्द्र मोदी के ब्लू इकोनामी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. उन्होंने समुद्रयान के अंदर का अपना एक वीडियो भी शेयर किया है. इसमें दिख रहा है कि मिशन पर जाने वाले लोग कैसे खुद को सुरक्षित बनाए रखेंगे।

समुद्र में मिल सकते हैं दुर्लभ खनिज दरअसल समुद्रयान अभियान के जरिए महासागरों की गहराइयों में निकल, कोबाल्ट, मैग्निज जैसे दुर्लभ खनिजों की खोज में मदद मिलेगी. यह मानव युक्त मिशन है इसलिए सीधे तौर पर इन खनिजों का परीक्षण और नमूना संग्रह हो सकेगा. समुद्रयान की डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है. इसमें एक खनन मशीन और unmanned vehicle भी हैं जो automatic है।

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