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एकजुटता की भावना, एकता की शक्ति विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में तनाव और परेशानी आम है और विपश्यना की शिक्षाएं उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में मदद कर सकती हैं…

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ध्यान गुरु एसएन गोयनका को उनके जन्मशताब्दी समारोह के अवसर पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एकजुटता की भावना, एकता की शक्ति विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है। आचार्य एस.एन गोयनका जी के जन्मशताब्दी समारोह में आप सभी ने वर्ष भर इसी मंत्र का प्रचार-प्रसार किया है। आचार्य एसएन गोयनका का व्यक्तित्व निर्मल जल की तरह शांत और गंभीर था। एक मूक सेवक की तरह सात्विक वातावरण का संचार करते थे। एक जीवन-एक मिशन के परफेक्ट उदाहरण के रूप में उनका एक ही मिशन था- विपश्यना।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपश्यना प्राचीन भारत का एक अनुपम उपहार होने के साथ ही एक आधुनिक विज्ञान भी है, जिसके जरिए युवा और बुजुर्ग लोगों को जीवन के तनाव और परेशानी से निपटने में मदद मिल सकती है। ध्यान और विपश्यना को कभी त्याग के माध्यम के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह व्यावहारिक जीवन में व्यक्तित्व विकास का माध्यम बन गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में तनाव और परेशानी आम है और विपश्यना की शिक्षाएं उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि एस एन गोयनका ‘एक जीवन एक मिशन’ के आदर्श उदाहरण थे। उनकी शिक्षाएं और समाज कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एक प्रेरणा स्रोत है, क्योंकि देश विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

योग को दुनिया भर में स्वीकार किया गया
उन्होंने कहा कि योग को दुनिया भर में स्वीकार किया गया है और ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ अब दुनिया भर में जीवन का हिस्सा है। हम सोचते थे कि ध्यान और विपश्यना वैराग्य का माध्यम है और इसे व्यावहारिक जीवन में नहीं लाया जाना चाहिए, लेकिन अब यह व्यक्तित्व विकास का माध्यम है।

विपश्यना आत्मा की ओर एक यात्रा है
पीएम मोदी ने कहा कि विपश्यना आत्मा की ओर एक यात्रा है और अपने भीतर गहराई से गोता लगाने का एक तरीका है। यह सिर्फ एक शैली नहीं, बल्कि एक विज्ञान है। हम इस विज्ञान के परिणामों से परिचित हैं। अब हमें आधुनिक विज्ञान के मानकों के अनुसार इसके साक्ष्य दुनिया के सामने पेश करने की जरूरत है।

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