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कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 5 चुनावी राज्यों से 1760 करोड़ रुपये का सामान किया जप्त, सबसे ज्यादा सामान तेलंगाना से

पांच राज्यों में मतदाताओं को लुभाने के उद्देश्य से अब तक 1,760 करोड़ रुपये से अधिक की मुफ्त सामान, ड्रग्स, नकदी, शराब और कीमती धातुएं जब्त की गई हैं…

नईदिल्ली (ए)। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 5 राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के बीच 1,760 करोड़ रुपये की नकदी, शराब और फ्रीबीज जब्त की हैं. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के मुताबिक यह राशि 2018 के विधानसभा चुनावों से पहले जब्त किए गए सामान से 7 गुना अधिक है। चुनाव आयोग ने सोमवार (20 नवंबर) को कहा कि पांच राज्यों में मतदाताओं को लुभाने के उद्देश्य से अब तक 1,760 करोड़ रुपये से अधिक की मुफ्त सामान, ड्रग्स, नकदी, शराब और कीमती धातुएं जब्त की गई हैं।

2018 के मुकाबले 7 गुना ज्यादा जब्ती
पीटीआई के मुताबिक चुनाव आयोग ने कहा, “यह जब्ती 9 अक्टूबर को 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद की गई है. यह रकम 2018 में इन्हीं राज्यों में पिछले विधानसभा चुनावों में की गई जब्ती से सात गुना ज्यादा है. पिछले चुनावों में यहां 239.15 करोड़ रुपये जब्त किए गए थे।

तेलंगाना-राजस्थान में वोटिंग बाकी
5 राज्यों में से अब तक 3 राज्यों में मतदान हो चुका है. इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम शामिल हैं, जबकि राजस्थान में 25 नवंबर और तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होना है. चुनाव आयोग के एक बयान के अनुसार इससे पहले गुजरात, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, त्रिपुरा और कर्नाटक में हुए छह राज्यों के विधानसभा चुनावों में 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की जब्ती की गई थी।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक तेलंगाना में सबसे अधिक 659.2 करोड़ रुपये के आइटम्स जब्त किए गए हैं. इसके बाद राजस्थान का नंबर है, जहां 650.7 करोड़ रुपये का सामान जब्त किया गया।

‘इलेक्शन कमीशन का प्रलोभन मुक्त चुनाव पर जोर’
मामले में चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि 5 राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते समय, मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रलोभन मुक्त चुनाव पर जोर दिया था. अधिकारी ने कहा कि इस बार आयोग ने चुनाव व्यय निगरानी प्रणाली (ESMS) के जरिए से मॉनिटरिंग प्रोसेस में टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया है।

बता दें कि इलेक्शन कमिशन ने चुनाव के खर्चे की मॉनिटरिंग के लिए 228 अधिकारियों को तैनात किया है. इसके अलावा आयोग ने 194 विधानसभा क्षेत्रों को व्यय संवेदनशील सीटों के रूप में चिह्नित किया है।

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