दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

इंटरप्राइज़ेस लोन एवं मुद्रा योजना से सशक्त हुईं दुर्ग जिले की लखपति दीदियाँ

दुर्ग। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने हेतु मुद्रा लोन व एंटरप्राइज़ेस फाइनेंस योजनाओं के माध्यम से दुर्ग जिले में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे उद्यम प्रारंभ कर अनेक महिलाएँ आज सफल उद्यमी के रूप में उभर रही हैं।

मिशन का उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को स्व-रोजगार एवं वेतन आधारित रोजगार से जोड़ना तथा महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। मुद्रा लोन बिना गारंटी उपलब्ध होने से महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने एवं उन्हें विस्तार देने में सहायता मिली है।

दिनांक 28.11.2025 को आयोजित जिला स्तरीय (DLCC) बैठक में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप स्व-सहायता समूह सदस्यों को व्यक्तिगत एंटरप्राइज़ लोन प्रदाय की प्रक्रिया को तीव्र किया गया है। LDM को सूची हस्तांतरित करते हुए कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा सभी प्रेषित प्रकरणों को शीघ्र स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में प्रगति कुल 188 प्रकरण विभिन्न बैंकों को प्रेषित इनमें से 58 प्रकरण बैंकों द्वारा स्वीकृत

इन स्वीकृत ऋणों से महिलाएँ अपने-अपने क्षेत्रों में रोजगार एवं स्वरोजगार स्थापित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं।

मनीषा साहू – स्टील व एल्यूमिनियम वर्क में नई उड़ान
जनपद पंचायत दुर्ग क्षेत्र के ग्राम धनोरा स्थित शिव शक्ति स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष मनीषा साहू ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ₹4.50 लाख का ऋण लेकर अपने पति के साथ स्टील गेट, अलमारी एवं एल्यूमिनियम वर्क के उद्यम का विस्तार किया। इस वित्तीय सहायता से उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ी और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दुलेश्वरी देवांगन – सिलाई से स्वावलंबन की ओर प्रेरक सफर: मां तुलसी स्व-सहायता समूह, ग्राम चंदखुरी सदस्य संख्या: 14 गठन तिथि: 05.10.2019
अध्यक्ष: दुलेश्वरी देवांगन सचिव: चित्ररेखा दुलेश्वरी दीदी प्रारंभ में घर पर सिलाई और छोटी साड़ी दुकान चलाकर मासिक मात्र ₹2400 की आय प्राप्त करती थीं।

समूह गठन के बाद बचत और बैंक ऋण के माध्यम से उन्होंने बुटीक एवं साड़ी बिक्री का कार्य शुरू किया। आगे चलकर ₹3,00,000 मुद्रा लोन प्राप्त कर स्वयं का दुकान संचालित करना प्रारंभ किया। आज उनकी मासिक आय बढ़कर ₹15,000 हो चुकी है। आगामी समय में वे सिलाई प्रशिक्षण केंद्र प्रारंभ कर अन्य महिलाओं को भी कौशल प्रशिक्षण देने की इच्छुक हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की ये सफल कहानियाँ महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता, उद्यमिता एवं नेतृत्व विकास की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

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