दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

गणेश चतुर्थी पर आचार्य राजेश शास्त्री ने बताई गणेश पूजा की महत्ता एवं आर्य समाज ने किया सम्मानित

 

भिलाई। आर्य समाज सुपेला के द्वारा साप्ताहिक वैदिक यज्ञ, सत्संग एवं गणेश चतुर्थी के उपलक्ष पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। आर्य समाज के महामंत्री राजाराम प्रसाद ने आचार्य राजेश शास्त्री को एलएलबी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने पर बधाई दी। आचार्य राजेश शास्त्री पिछले 5 वर्षों से भिलाई दुर्ग क्षेत्र में वैदिक सनातन धर्म की सेवा कर रहे हैं। आर्य समाज के प्रधान रामनाथ राय एवं रामदेव ने आचार्य राजेश शास्त्री के कार्यों को बहुत सुंदर एवं सराहनीय कहा।

कोषाध्यक्ष उमा शंकर एवं उपमंत्री महेन्द्र खरे ने अंगवस्त्र एवं श्रीफल प्रदान कर आगे निरंतर इसी तरह कार्यों को करते रहने हेतु प्रेरित किया। आचार्य राजेश शास्त्री ने इस अवसर पर समस्त पदाधिकारियों एवं सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

राजेश शास्त्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति , सभ्यता एवं वैदिक धर्म का प्रचार का कार्य अनवरत चलता रहेगा।
मान्यता है कि महर्षि श्री वेदव्यास ने महाभारत को लेखनीबद्ध करने हेतु श्री गणेश भगवान जी को चुना। साथ ही गणेश जी ने बिना रुके महाभारत लिखने की शर्त रखी एक वक्त ऐसा आया जब गणेश जी की लेखनी टूट गई तो उन्होंने अपने एक दांत को तोड़कर उसे अपनी लेखनी बना लिया।

इस प्रकार श्रीगणेश जी को एकदंत भी कहा जाता है। इस प्रसंग का तात्पर्य है कि हमें सदैव संपूर्ण समर्पण और अनुशासन के साथ अपने कार्य को पूरा करना चाहिए। आर्य समाज के उप मंत्री महेंद्र खरे ने समस्त अतिथियों एवं पदाधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।

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