देश-दुनियाफीचर्ड

तटरक्षक बल को मिला अब तक का सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’

इस पोत में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग अपने आप में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल का वास्तविक अर्थ ऐसे ही जटिल और अत्याधुनिक रक्षा प्रोजेक्ट्स में दिखाई देता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत का डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम अब काफी परिपक्व हो चुका है और जटिल निर्माण चुनौतियों को संभालने में सक्षम है…

 

 

नईदिल्ली (ए)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में देश का सबसे बड़ा स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ शामिल किया। यह पोत विशेष रूप से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के लिए डिजाइन किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका यहीं तक सीमित नहीं है। यह सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन, तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में भी समान रूप से सक्षम है। इसका अर्थ यह है कि ‘समुद्र प्रताप’ में एक ही प्लेटफॉर्म पर कई क्षमताओं को इंटीग्रेट किया गया है। रक्षा मंत्री के अनुसार, यही आधुनिक अप्रोच आज की समुद्री चुनौतियों की मांग है, जहां लचीलापन और तैयारी दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘समुद्र प्रताप’ 114.5 मीटर लंबा और लगभग 4,200 टन वजनी है। यह 60% से अधिक स्वदेशी तकनीक से बना है और इसकी अधिकतम गति 22 नॉट से ज्यादा है, जो इसे लंबी दूरी के परिचालन के लिए बेहद सक्षम बनाती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस पोत में 60% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग अपने आप में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल का वास्तविक अर्थ ऐसे ही जटिल और अत्याधुनिक रक्षा प्रोजेक्ट्स में दिखाई देता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत का डिफेंस इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम अब काफी परिपक्व हो चुका है और जटिल निर्माण चुनौतियों को संभालने में सक्षम है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि ‘समुद्र प्रताप’ भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन की गई प्रदूषण नियंत्रण वेसल है और तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा पोत भी है। उन्होंने कहा कि 4,170 टन वजन और लगभग 115 मीटर की लंबाई इसकी विशालता को दर्शाती है, जबकि 22 नॉट की गति इसकी ऑपरेशनल क्षमता को साबित करती है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में समुद्री प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक चुनौती बनकर उभरा है। इससे मछुआरों की आजीविका, तटीय समुदायों का भविष्य और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा प्रभावित होती है। ऐसे में तटरक्षक बल द्वारा चलाए जा रहे तटीय स्वच्छता अभियान, प्रदूषण रिस्पांस अभियान और बहु-एजेंसी समन्वय वास्तव में सराहनीय हैं।

उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल ने देशवासियों के भीतर एक मजबूत भरोसा पैदा किया है। मछुआरे और तटीय समुदाय निश्चिंत होकर अपने कार्यों में लगे रहते हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि किसी भी आपात स्थिति में तटरक्षक बल उनके साथ खड़ा है। साथ ही यह भरोसा देश के दुश्मनों के भीतर भी है कि भारत की समुद्री सीमा की ओर आंख उठाने की हिमाकत की गई, तो उसका करारा जवाब मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा, “समुद्र हमारी संस्कृति, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे भविष्य का आधार है। एक सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र ही सुरक्षित व्यापार, सुरक्षित जीवन और सुरक्षित पर्यावरण की गारंटी दे सकता है। ‘समुद्र प्रताप’ जैसे प्लेटफॉर्म हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि भारत अपनी समुद्री जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

उन्होंने बताया कि ‘समुद्र प्रताप’ पर दो महिला अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल बनेंगी। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज महिला अधिकारी पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक ऑफिसर और लॉ ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा रही हैं। उन्हें होवरक्राफ्ट ऑपरेशन और फ्रंटलाइन मिशनों के लिए भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button