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तेज रफ्तार वालों पर कसेगी नकेल, मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे को मिलेगा राज्य का पहला ITMS

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर राज्य का पहला इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगा रहा है। जानें इसके फायदे…

 

मुंबई (ए)। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर राज्य का पहला इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लगा रहा है। जहां सप्ताह के दिनों में औसत ट्रैफिक 40,000 वाहनों और वीकेंड में 60,000 वाहनों के आसपास होता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हाईवे पुलिस अधिकारियों और एमएसआरडीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह सिस्टम जून के पहले सप्ताह तक चालू हो जाएगा। इससे जहां ट्रैफिक मैनेजमेंट का आधुनिकीकरण होगा और वहीं यह सड़क सुरक्षा बढ़ाएगा।

पहले चरण के लिए, एक्सप्रेसवे के 95 किलोमीटर के खंड पर 39 गैन्ट्री लगाए गए हैं। और 17 तरह के यातायात उल्लंघनों का पता लगाने के लिए इन गैन्ट्री पर 218 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पावर्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। सभी कैमरे और टोल बूथ ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान से लैस होंगे। जो पुलिस को ई-चालान जारी करने में सक्षम बनाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि एक्सप्रेसवे के सभी एंट्री गेट मालवाहक वाहनों के लिए वेट-इन मोशन मशीनों से लैस होंगे। जबकि 11 स्थानों पर मौसम निगरानी प्रणाली स्थापित की जाएगी। 36 टो वैन, क्रेन और एंबुलेंस सहित सभी मौजूदा आपातकालीन वाहन वाहन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस होंगे। जबकि 23 विभिन्न स्थानों पर वेरिएबल मैसेजिंग साइन बोर्ड मोटर चालकों को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे। जिसमें रियल टाइम में ट्रैफिक परिस्थितियों, सड़क बंद होने और मौसम पर अपडेट शामिल हैं।

राजमार्ग यातायात पुलिस (पनवेल) के अधीक्षक तानाजी चिकले ने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक सड़क प्रबंधन और मोटर चालकों की सुरक्षा में भारी सुधार करेगी। उक्त खबर आप सारनाथ एक्सप्रेस में पढ़ रहे हैं।

चिकले ने कहा, “वर्तमान में, हालांकि एक्सप्रेसवे पर चुनिंदा जंक्शनों और क्रॉसओवर पर स्पीड की निगरानी करने वाले सीसीटीवी लगाए गए हैं। मोटर चालक अक्सर तभी धीमे हो जाते हैं जब वे इन कैमरों के पास आते हैं या ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को देखते हैं।” उन्होंने कहा कि मोटर चालक कई मोबाइल एप का इस्तेमाल करते हैं जो उन्हें स्पीड कैमरों या यहां तक कि ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की मौजूदगी के बारे में पहले से ही सचेत कर देते हैं। जिससे उनके लिए निगरानी बिंदु पर धीमी रफ्तार से चलना आसान हो जाता है।

चिकले ने कहा, “आईटीएमएस के तहत, जिस वाहन को तेज रफ्तार से चलते पाया गया है या लगातार यातायात नियमों का उल्लंघन करते पाया गया है, उसका लाइव फीड आगे टोल बूथ पर भेजा जाएगा। और जब वाहन उसके पास पहुंचेगा तो हूटर बजेगा। इससे यातायात नियमों और अनुशासन को लागू करने में मदद मिलेगी।”
अधिकारियों ने बताया कि आईटीएमएस के जरिए ई-चालान जारी किए जाएंगे। और ट्रैफिक पुलिस उन वाहन मालिकों को ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी नहीं करेगी जो लंबित चालानों का भुगतान नहीं करते हैं। ऐसे प्रमाणपत्र भारी वाहनों के पंजीकरण के रिन्युअल के दौरान जरूरी होते हैं।
ITMS राजमार्ग से खराब हो चुके वाहनों को हटाने में भी तेजी लाएगा और ट्रैफिक फ्लो को सुचारू करेगा। चिकले ने कहा, ” इतनी ज्यादा मात्रा में यातायात होने के कारण, जाम लगना आम बात है। खासकर तब जब भारी वाहन बोर्घाट क्षेत्र में खराब हो जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि हालांकि ऐसी दुर्घटनाओं के लिए क्रेनें तैयार रहती हैं। लेकिन उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में अभी एक घंटे से ज्यादा समय लग जाता है। उक्त खबर आप सारनाथ एक्सप्रेस में पढ़ रहे है।
चिकले ने बताया कि “आईटीएमएस के ट्रायल के दौरान, जिसने खराब वाहनों की सूचना बहुत तेजी से प्रदान की, प्रतिक्रिया समय घटकर आधे घंटे का रह गया।”

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर आईटीएमएस लगाने के बाद, राज्य में दूसरा आईटीएमएस से लैस राजमार्ग बनाने के लिए समृद्धि महामार्ग पर भी इसी तरह की प्रणाली स्थापित करने का काम शुरू किया जाएगा।

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