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नए संसद भवन पर कांग्रेस के विरोध को केंद्रीय मंत्री ने बताया पाखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान में MLA हाउसिंग प्रोजेक्ट पर घेरा

नईदिल्ली (ए)। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार को घेर रही है। अब केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘चल रहे निर्माण कार्य को लेकर कांग्रेस का पाखंड, लग्जरी एमएलए हाउसिंग प्रोजेक्ट पर होने वाला खर्च ध्यान आकर्षित करता है। महाराष्ट्र और राजस्थान में लग्जरी एमएलए हाउसिंग प्रोजेक्ट पर 1166 करोड़ रुपए खर्च जबकि देश के नए संसद भवन पर सिर्फ 862 करोड़ रुपए का खर्च’

दरअसल राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार ने विधायकों के लिए लग्जरी फ्लैटों का निर्माण कार्य शुरू किया है। यहां 160 फ्लैट राज्य विधानसभा के नजदीक स्थित ज्योति नगर में बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि 20 मई को यहां निर्माण कार्य शुरू हुआ। कांग्रेस, केंद्र की सरकार द्वारा दिल्ली में शुरू किये गये सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का विरोध करती रही है और इसे पैसों की बर्बादी बताती रही है। जबकि पार्टी राजस्थान में हो रहे निर्माण को कानून के मुताबिक बताती आई है।

राजस्थान में जो एमएलए फ्लैट बनाए जा रहे हैं उसके बारे में मिली जानकारी के मुताबिक सभी फ्लैट 3200 स्कवायर फीट के होंगे। इसमें चार बेडरूम और एक सेपरेट पार्किंग स्पेस होगा। यहां हाउसिंग बोर्ड ने न्यूज एजेंसी ‘ANI’ को बताया था कि जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 176 फ्लैटों के निर्माण का प्रोपोजल दिया था जिसमें से 160 फ्लैट को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने अप्रूव्ल दिया है। इन फ्लैटों को बनाने की डेड लाइन अभी 30 महीने की रखी गई है। इसके निर्माण में करीब 266 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसी तरह महाराष्ट्र में मनोरमा एमएलए प्रोजेक्ट के तहत एमएलए हॉस्टल बनाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 900 करोड़ रुपए होगी। याद दिला दें कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले महीने सेंट्रल विस्टा परियोजना का विरोध करते हुए इसे आपराधिक बर्बादी करार दिया था। कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा परियोजना पर अपनी योजना को टाले और कोरोना महामारी के दौरान लोगों का जीवन बचाने के लिए चिकित्सा के बुनियादी ढांचे में सुधार को प्राथमिकता दे।

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