दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

पिता प्रत्येक बच्चों के लिए धरती पर ईश्वर का रूप होते है : आरआई नीलेश द्विवेदी

दुर्ग। मेरे पिताजी मेरे लिए आदर्श है। क्योंकि वे एक आदर्श पिता हैं। उनमें वह सारी योग्यताएं मौजूद हैं जो एक श्रेष्ठ पिता में होनी चाहिए। वह मेरे लिए केवल एक पिता ही नहीं बल्कि मेरे सबसे अच्छे दोस्त भी हैं, जो समय-समय पर मुझे अच्छी और बुरी बातों का आभास कराकर आगाह करते हैं। पिताजी मुझे हार न मानने और हमेशा आगे बढ़ने की सीख देते हुए मेरा हौसला बढ़ाते हैं।

पिता से अच्छा मार्गदर्शक कोई हो ही नहीं सकता। हर बच्चा अपने पिता से ही सारे गुण सीखता है जो उसे जीवन भर परिस्थितियों के अनुसार ढलने के काम आते हैं। उनके पास सदैव हमें देने के लिए ज्ञान का अमूल्य भंडार होता है, जो कभी खत्म नहीं होता।
पिताजी हमेशा मुझे अनुशासन में रहना सिखाते हैं और वे खुद भी अनुशासित रहते हैं। मैने हमेशा पिता से सीखा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, हमें अपने आप पर से नियंत्रण कभी नहीं खोना चाहिए।

पिताजी विनय कुमार वन विभाग में कार्यरत थे, हम सूरजपुर के छोटे से गांव भैयाथान है, जहां शुरुआती दिनों में पढ़ाई का अभाव था लेकिन पिताजी पढ़ाई को लेकर बहुत गभीर थे, वह पढ़ाई को लेकर कोई भी समझौता नही करते थे। आज उन्ही की शिक्षा और मार्गदर्शन के कारण मैं यहां तक पहुंच पाया हूँ।
पिता प्रत्येक बच्चे के लिए धरती पर ईश्वर का साक्षात रूप होते हैं। वे अपनी संतान को सुख देने के लिए अपने सुखों को भी भुला देते हैं।

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