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प्रधानमंत्री मोदी 7 साल बाद जॉर्डन पहुंचे, एयरपोर्ट पर पीएम जाफर ने जोरदार स्वागत किया

भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपए था। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है…

 

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को दो दिन के दौरे पर जॉर्डन पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर जॉर्डन के पीएम जाफर हसन ने उनका जोरदार स्वागत किया। होटल पहुंचने पर प्रवासी भारतीयों ने मोदी का स्वागत किया। पीएम ने भारतीय मूल के लोगों से मुलाकात भी की। इस दौरान कलाकारों ने मोदी के सामने कल्चरल परफॉर्मेंस दी।

PM मोदी अब से थोड़ी देर में जॉर्डन किंग अब्दुल्ला के साथ हुसैनिया पैलेस (महल) में मुलाकात करेंगे। हुसैनिया पैलेस पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया जाएगा। पीएम मोदी का यह दौरा किंग अब्दुल्ला के निमंत्रण पर हो रहा है। पीएम मोदी उनसे द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे।

यह यात्रा भारत और जॉर्डन के राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने पर हो रही है। वे 7 साल बाद जॉर्डन पहुंचे हैं। इससे पहले वे 2018 में एक ट्रांजिट विजिट के दौरान जॉर्डन में रुके थे।

हुसैनिया पैलेस जॉर्डन की राजधानी अम्मान का प्रमुख शाही महल है। इसका इस्तेमाल विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के औपचारिक स्वागत और द्विपक्षीय बैठकों के लिए किया जाता है। यहां मुलाकात होना जॉर्डन के कूटनीतिक महत्व और सम्मान को दर्शाता है।

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का सबसे करीबी वंशज माना जाता है। उनका संबंध सीधे हाशिमी वंश से है। मोहम्मद साहब कुरैश कबीले से थे।कुरैश कबीले की एक शाखा बनू हाशिम थी। इसी बनू हाशिम से हाशिमी वंश शुरू हुआ, जिसे इस्लाम में सबसे प्रतिष्ठित वंश माना जाता है।

पैगंबर मोहम्मद साहब की बेटी हजरत फातिमा, उनके दामाद हजरत अली, उनके बेटे हसन और हुसैन आगे चलकर कई पीढ़ियों बाद मक्का के शरीफ बने। मक्का के शरीफ ही बाद में हाशिमी राजवंश के शासक बने।

जॉर्डन के शासक हाशिमी राजवंश से आते हैं। इस राजवंश ने करीब 700 साल तक मक्का पर शासन किया। पहले जॉर्डन के राजा शरीफ हुसैन बिन अली थे। मौजूदा राजा अब्दुल्ला द्वितीय, उन्हीं के पड़पोते हैं। इस तरह उनका वंश सीधे पैगंबर मोहम्मद साहब से जुड़ता है।

जॉर्डन एक संवैधानिक राजशाही है, जहां राजा बनने की प्रक्रिया संविधान में तय है। जॉर्डन का संविधान कहता है कि सत्ता का उत्तराधिकारी हाशिमी राजवंश से ही होगा और राजगद्दी पिता से बेटे को मिलेगी।

भारत और जॉर्डन ने 1950 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, जिसके 2025 में 75 साल पूरे हो गए हैं। मोदी इसी मौके पर जॉर्डन पहुंचे है।

भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है। दोनों देशों के बीच 2023-24 में 26,033 करोड़ रुपए का व्यापार हुआ। इसमें भारत का निर्यात करीब 13,266 करोड़ रुपए था। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर यानी 45,275 करोड़ करने का लक्ष्य रखा है।

भारत, जॉर्डन से बड़ी मात्रा में रॉक फॉस्फेट और फर्टिलाइजर का कच्चा माल खरीदता है। भारत के कुल रॉक फॉस्फेट आयात में जॉर्डन की हिस्सेदारी करीब 40% है।

दूसरी तरफ जॉर्डन भारत से मशीनरी, पेट्रोलियम, अनाज, रसायन, मीट, ऑटो पार्ट्स और उद्योगों से जुड़े उत्पादों का आयात करता है। भारतीय कंपनियों ने जॉर्डन के फॉस्फेट और टेक्सटाइल सेक्टर में 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।

जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला 27 फरवरी 2018 को भारत दौर पर आए थे। इस दौरान मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे। दोनों नेताओं की एक महीने में यह दूसरी मुलाकात थी।

इससे पहले 10 फरवरी को पीएम मोदी फिलिस्तीन की ऐतिहासिक यात्रा पर जा रहे थे। उस समय भारत से फिलिस्तीन जाने की कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसी वजह से मोदी का विमान जॉर्डन की राजधानी अम्मान में उतरा।

यह यात्रा केवल 2 घंटे की ट्रांजिट विजिट थी। आमतौर पर ऐसे स्टॉप पर सिर्फ औपचारिक अधिकारी मिलते हैं, लेकिन इतने कम समय के बावजूद जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला मोदी से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं की मुलाकात एयरपोर्ट के पास ही हुई थी।

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