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महाकुंभ में कल्पवास में रहेंगी दुनिया की सबसे अमीर महिला लॉरेन पॉवल

लॉरेन पॉवेल को हिंदू और बौद्ध धर्म से विशेष लगाव है, जो उनके दिवंगत पति स्टीव जॉब्स के जीवन का हिस्सा रहा है। स्टीव जॉब्स बाबा नीब करौली और परमहंस योगानंद की शिक्षाओं से प्रभावित थे…

प्रयागराज (ए)। दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में से एक, लॉरेन पॉवल जॉब्स महाकुंभ मेले में भाग लेंगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक लॉरेन 13 जनवरी से 29 जनवरी तक प्रयागराज में रहेंगी और कल्पवास में रहते हुए साधुओं के साथ सादगीपूर्ण जीवन बिताएंगी। उन्होंने निरंजनी अखाड़े में रहने का फैसला लिया है, जहां वे गंगा स्नान और आध्यात्मिक गतिविधियों में शामिल होंगी।

लॉरेन पॉवेल को हिंदू और बौद्ध धर्म से विशेष लगाव है, जो उनके दिवंगत पति स्टीव जॉब्स के जीवन का हिस्सा रहा है। स्टीव जॉब्स बाबा नीब करौली और परमहंस योगानंद की शिक्षाओं से प्रभावित थे और हमेशा योगी की आत्मकथा नामक पुस्तक अपने साथ रखते थे। लॉरेन भी इन्हीं परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए महाकुंभ में भाग लेंगी। उनकी शादी भी बौद्ध तरीके से संपन्न हुई थी।

लॉरेन पॉवल जिनकी उम्र 61 साल है, महाकुंभ के दौरान साधु-संतों के बीच रहकर आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लेंगी। लॉरेन अपने सादगीपूर्ण जीवन के लिए मशहूर हैं। कल्पवास का अर्थ गहन आध्यात्मिक अनुशासन है, जो प्राचीन हिंदू परंपराओं से प्रेरित है। यह एक महीने की अवधि में होता है, जिसमें भक्त गंगा में स्नान, संतों के प्रवचन और भजन-कीर्तन करते हैं।

कल्पवास का उद्देश्य सांसारिक जीवन से ऊपर उठकर आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने की प्रक्रिया है। लॉरेन इस परंपरा का पालन करते हुए साधुओं के शिविर में ठहरेंगी। लॉरेन जैसी हस्ती के महाकुंभ में आने से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

यूपी सरकार और महाकुंभ प्रशासन लॉरेन की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। उनके आगमन से महाकुंभ में आध्यात्मिकता और वैश्विक संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिलेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार 61 साल की लॉरेन यहां 13 जनवरी को आ जाएंगी और 29 जनवरी तक ठहरेंगी। जुलाई 2020 तक लॉरेन पॉवेल और उनके परिवार को फोर्ब्स की दुनिया के अरबपतियों की सालाना सूची में 59वें स्थान पर रखा गया था। टाइम्स मैगज़ीन ने कई बार उन्हें दुनिया की सबसे प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में शामिल किया है।

क्या होता है कल्पवास?
‘कल्पवास’ शब्द संस्कृत से उत्पन्न हुआ है, जहाँ ‘कल्प’ का अर्थ है ब्रह्मांडीय युग और ‘वास’ का अर्थ है- प्रवास या वास। महाकुम्भ मेला के संदर्भ में, कल्पवास एक पवित्र प्रवास, एक गहन आध्यात्मिक अनुशासन की अवधि और उच्च चेतना की खोज में समर्पित प्रवास का प्रतीक है। यह तीर्थयात्रियों के लिए एक अद्वितीय अवसर है कि वे दैनिक जीवन की सामान्य दिनचर्या को पार करते हुए, ईश्वर के साथ गहरे संबंध को बढ़ावा दें।

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