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मुख्यमंत्री अपने गृह मंत्रालय से केंद्र सरकार को महादेव एप्प के खिलाफ प्रमाण उपलब्ध कराएं- नारायण चंदेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने महादेव एप्प पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपने गृह मंत्रालय से महादेव एप्प के खिलाफ प्रमाण केंद्र सरकार को उपलब्ध कराएं ताकि केंद्र सरकार आगे की कार्यवाही कर सके। लेकिन मुख्यमंत्री अपने लोगों को बचाने की राजनीति में लगे हुए हैं। महादेव एप्प पर किसी कार्रवाई की उनकी कोई मंशा नहीं है। यह इन्हीं की सरकार के संरक्षण में संचालित हो चुका है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सवाल खड़े करने की बीमारी है। जबकि उन्हें छत्तीसगढ़ में संचालित हो रहे महादेव एप्प की गतिविधियों के विरुद्ध प्रमाण केंद्र सरकार को उपलब्ध न कराने पर जवाब देना चाहिए। कमाल है कि भूपेश बघेल के राज में उनके अपने लोगों के तार जिस एप्प से जुड़ रहे हैं और वे उस पर केंद्र सरकार से कार्रवाई चाहते हैं। बेहतर है कि वे अपनों को बचाने होशियारी दिखाने की बजाय केंद्र सरकार को साक्ष्य उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल महादेव एप में लिप्त अपने शासकीय गुर्गों और पार्टीजनों को बचाने की मशक्कत करना छोड़कर संबंधित प्रमाण साक्ष्य के साथ केंद्र की संबंधित एजेंसियों को एप को बैन करने हेतु सूचना साझा करें जिससे आगे की उचित कार्रवाई कर इसे बैन करना संभव हो। श्री चंदेल ने सवाल किया कि जब भी इस सरकार पर कोई गंभीर आरोप लगते हैं तो हर आरोप और सवालों का जवाब देने की जगह मुख्यमंत्री बघेल बगलें झाँकते हुए क्यों दिखाई देते हैं?

नेता प्रतिपक्ष श्री चंदेल ने कहा कि सत्ता कांग्रेस पार्टी की है, जिसमें उनके खास करीबी लोग सत्ता का लाभ उठाकर सट्टा और शराब जैसे अवैध व्यापार को संगठित अपराधियों की तरह गिरोह बनाकर चलाते हुए पाए जा रहे हैं। जिस पुलिस विभाग पर सेवा, सुरक्षा, अनुशासन का जिम्मा है उसी विभाग के ए.एस.आई. द्वारा संगठित गिरोह बनाकर महादेव एप के माध्यम से सट्टा का हाईटेक व्यापार संचालित करते पाए जाना छत्तीसगढ़ के खुफ़िया तन्त्र की नाकामी को इंगित करता प्रतीत हो रहा है। श्री चंदेल ने कहा कि महादेव एप पर भाजपा के पूर्व मंत्री द्वारा तथ्यपरक संबंधित दस्तावेज पुलिस विभाग को भेजा गया था और इस विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुलासा भी किया गया, जिसके बाद कार्रवाई करने पर सरकार विवश हुई। हर बार किसी गंभीर आरोप में घिर जाने पर केंद्र को पत्र लिखकर अपना पल्ला झाड़ने वाले मुख्यमंत्री बघेल जनता को यह बताएँ कि छग पुलिस विभाग का अधिकारी ही जब सट्टे के कारोबार का हैण्डलर हो और जिसका लिंक काले कारोबार के तार डी-कंपनी तक जुड़ते दिखाई दे रहा हो, मुख्यमंत्री के सलाहकार से रिश्ता जुड़ने का पुख्ता संदेह हो रहा हो और जिसका प्रमाण विश्वसनीय राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को मिल रहा हो, तब ऐसे में केंद्रीय एजेंसी की जाँच में बाधा और राजनैतिक दबाव बनाकर किसका दामन बचाने की कोशिश हो रही है?

नेता प्रतिपक्ष श्री चंदेल ने कहा कि छग में कोयला लेवी घोटाला हो, शराब के 2000 करोड़ के लेनदेन का फर्जीवाड़ा कर लाभ लेने व देने का मामला हो या फिर सट्टे के अवैध कारोबार का, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य को ही मुख्यालय बनाकर कार्य किया गया, अबतक 445 लोगों की संलिप्तता पाकर उनकी गिरफ़्तारी मामले की गंभीरता को बताता है। छग में ईडी द्वारा हो रही हर जाँच लिखित दस्तावेज के माध्यम से फूलप्रूफ अवैध धन के शोधन लेन-देन पर हो रही है किंतु देखने हर बार ऐसे लोगों के संरक्षण में मुख्यमंत्री ताल ठोंकते हुए क्यों दिखाई पड़ते हैं? अब तो जनता भी जान गईं है कि यह पूरी दाल ही काली है, इसीलिए रोज मीडिया में अनर्गल प्रलाप और सड़क पर बेहूदा प्रदर्शन हो रहे हैं। इन्हीं कारणों से छत्तीसगढ़ के सभी विधानसभा क्षेत्रों में जनहित के सारे कार्य दशकों पीछे छूट गए हैं। श्री चंदेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मतदाताओं और समझदार युवाओं ने अब रोटी पलटने का मन बना लिया है। इन पौने पांच सालों में कांग्रेस सरकार का चाल चेहरा और चरित्र उजागर हो चुका है और काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती।

नेता प्रतिपक्ष श्री चंदेल ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा खुफ़िया तन्त्र राज्य सरकार के विषय हैं। इतना बड़े गिरोह का संचालन छत्तीसगढ़ जैसे शांत राज्य से होना, जिसमें अंडर वर्ल्ड के लोगों की अभिरुचि हो और सरकार का ख़ुफ़िया तन्त्र सोया रहे या यूँ कहा जाए कि सत्ताधीशों और उनके करीबियों की कठपुतली बना रहे, सरकार के नैतिक पतन और विफलता का प्रमाण ही है। श्री चंदेल ने सवाल किया कि क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री अथवा छत्तीसगढ़ के गृह विभाग ने दस्तावेजी साक्ष्य प्रमाण के साथ केंद्र के किसी विभाग के साथ जानकारी शेयर कर कभी महादेव एप को बैन करने की मांग की है? यदि यह कार्य ईमानदारी के साथ होता तो निश्चित ही ऐसे एप बैन करने की कार्रवाई भी होगी।

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