दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

दुर्ग राष्ट्रीय लोक अदालत में सफलता का नया कीर्तिमान, 1013730 प्रकरणों का आपसी समझौते से हुआ निराकरण

दुर्ग। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में दिनांक 14 मार्च 2026 को जिला न्यायालय दुर्ग में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस गरिमामयी आयोजन का औपचारिक शुभारंभ मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ रमेश सिन्हा के करकमलों द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में, न्यायालय परिसर पहुँचने पर माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय पोर्टफोलियो जज की एनसीसी (NCC) कैडेट्स के एक अनुशासित दस्ते द्वारा भव्य अगवानी की गई और उन्हें सम्मानपूर्वक मंच तक एस्कॉर्ट किया गया। कैडेट्स की इस भागीदारी ने समारोह की गरिमा और अनुशासन में अभिवृद्धि की।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की उपस्थिति ने न्यायिक बिरादरी और पक्षकारों में उत्साह का संचार किया। अपने संबोधन में माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत केवल प्रकरणों के बोझ को कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में ‘सुलह से न्याय’ की भावना को स्थापित करने का एक सशक्त मंच है। विधिक जागरूकता को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से, इस अवसर पर माननीय मुख्य न्यायाधीश महोदय द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर आधारित एक विशेष ‘पंडवानी गीत’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर माननीय न्यायमूर्ति श्री नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ एवं पोर्टफोलियो जज, जिला दुर्ग की विशेष उपस्थिति रहे।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक उत्साह का संचार करते हुए, जिला न्यायालय बार के सदस्यों की सांस्कृितक एवं नुक्कड-नाटक टीम द्वारा न्यायालय परिसर में इस विशेष पंडवानी गायन एवं गीत प्रदर्शित किया गया। गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में इस दी गयी उपस्थिति की विशेष सराहना की गयी। बार के सदस्यों द्वारा कला के माध्यम से विधिक जागरुकता फैलाने के इस अनूठे प्रयास ने सभी का मन मोह लिया।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन हेतु जिला न्यायालय दुर्ग, परिवार न्यायालय तथा भिलाई-3, पाटन एवं धमधा स्थित न्यायालयों में कुल 39 पीठों का गठन किया गया था। सघन प्रयासों के फलस्वरूप आज कुल 1013826 प्रकरणों को आपसी समझौते हेतु रखा गया, जिनमें से कुल 10,13,730 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इन प्रकरणों के निपटारे के माध्यम से कुल 49,60,31,667 रुपये की समझौता एवं अवार्ड राशि पारित की गई, जिससे वर्षों से लंबित विवादों का अंत हुआ और पक्षकारों को त्वरित राहत प्राप्त हुई।

विभिन्न श्रेणियों के प्रकरणों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई, जिसमें समझौता योग्य आपराधिक मामले, दीवानी वाद और चेक बाउंस के मामले शामिल थे। सामाजिक सौहार्द की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, परिवार न्यायालय में काउंसलिंग के माध्यम से बिछड़े हुए जोड़ों ने पुनः एक साथ रहने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, मोटर दुर्घटना दावा के प्रकरणों का निराकरण कर पीड़ितों को राहत प्रदान की गई। प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक, बिजली और दूरसंचार से संबंधित मामलों को न्यायालय पहुँचने से पूर्व ही सुलझा लिया गया।

मुख्य न्यायाधीश के मार्गदर्शन में तकनीकी और नवाचारों का भी प्रभावी उपयोग किया गया। लोक अदालत की कार्यवाही भौतिक और वर्चुअल दोनों माध्यमों से संचालित की गई, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के पक्षकारों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त, मोबाइल अवेयरनेस वैन के माध्यम से ऐसे वृद्ध और बीमार पक्षकारों को उनके घर पर ही लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़ा गया, जो न्यायालय आने में असमर्थ थे।

न्यायिक प्रक्रिया के शैक्षणिक पहलू को सुदृढ़ करते हुए, जिले के विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी इस लोक अदालत की कार्यवाही में भाग लिया। विद्यार्थियों ने विभिन्न पीठों में बैठकर समझौतों की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, जिससे उन्हें वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) और विधिक प्रणालियों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।

समारोह के दौरान जन-सेवा और मानवीय संवेदनाओं का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। न्यायालय परिसर में आए पक्षकारों, अधिवक्ताओं एवं आमजन के लिए “एक समाजसेवी संस्था” की ओर से निःशुल्क लंगर (भोजन) की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही केन्द्रीय जेल दुर्ग के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगायी गयी तथा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में लोगों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने इस आयोजन की सफलता के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस आयोजन ने न केवल लंबित प्रकरणों को कम किया, बल्कि आपसी भाईचारे और सेवा भाव के माध्यम से न्याय व्यवस्था के प्रति जन-सामान्य का विश्वास और अधिक सुदृढ़ किया है।

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