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मोटर वीकल ऐक्ट मुआवजे से बीमा की रकम नहीं घटाई जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि नियोक्ता द्वारा दी गई ग्रुप बीमा या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से मिली राशि को मोटर व्हीकल एक्ट के मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा ये लाभ स्वतंत्र अनुबंध से जुड़े हैं और दोहरा लाभ नहीं माने जाएंगे…

 

 

नईदिल्ली (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एंप्लायर (नियोक्ता) द्वारा प्रदान की गई ग्रुप बीमा योजनाओं या अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों के तहत प्राप्त राशि को मोटर व्हीकल ऐक्ट के तहत दिए जाने वाले मुआवजे से घटाया नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मित्तल की अगुवाई वाली बेंच ने 17 मार्च को केरल हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसलों के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया।

इन उच्च न्यायालयों ने यह माना था कि पीड़ित की मौत के बाद दावेदारों को प्राप्त समूह बीमा लाभ को मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिए गए मुआवजे से नहीं घटाया जा सकता है। हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए व्यवस्था दी है कि मोटर व्हीकल ऐक्ट के तहत मिलने वाले मुआवजे से एंप्लायर द्वारा प्रदान की गई ग्रुप इंश्योरेंस और अन्य लाभों को नहीं घटाया जा सकता है।

हाई कोर्ट के फैसले की पुष्टि करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से प्राप्त लाभ ‘आर्थिक लाभ’ की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए इन्हें मुआवजे से घटाया नहीं जा सकता। अपीलकर्ताओं के इस तर्क को खारिज करते हुए कि इससे दावेदारों को ‘दोहरा लाभ’ मिलेगा, अदालत ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता द्वारा प्रदान किए गए बीमा लाभ एक स्वतंत्र अनुबंध से उत्पन्न होते है, और उनका मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले वैधानिक मुआवजे से कोई सीधा संबंध नहीं है।

SC ने HC के फैसलों को बरकरार रखा, समूह बीमा लाभों की कटौती को अवैध बताया, और निर्धारित मुआवजा 6 सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि मोटर दुर्घटना मुआवजे के मामलों में दावेदारों के अधिकारों को कम नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले के फैसलों का भी हवाला दिया और कहा कि इन फैसलों में यह सिद्धांत स्थापित किया गया था कि केवल वही आर्थिक लाभ मुआवजे से घटाए जा सकते है जिनका दुर्घटना से सीधा संबंध हो।

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