दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

छत्तीसगढ़ भोजपुरी परिषद ने राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित खिलाड़ियों का किया सम्मान, बतौर अतिथि शामिल हुए विश्व भोजपुरी परिषद के महासचिव

भिलाई। राष्ट्रीय खेल दिवस पर प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में विभिन्न खेल विधाओं के प्रतिभावान खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया गया था। उन पुरस्कृत खिलाड़ियों/कोच को शुक्रवार को छत्तीसगढ़ भोजपुरी परिषद द्वारा सम्मानित किया गया साथ ही इन्हे सम्मान देने के लिए परिषद ने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।

छत्तीसगढ़ भोजपुरी परिषद द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि विश्व भोजपुरी परिषद, नईदिल्ली के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जनार्दन सिंह शामिल हुए वही कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष प्रभूनाथ बैठा ने किया। बतौर अतिथि बिरेंद्र यादव, निशिकांत शर्मा, पीपी मिश्रा, नंदकिशोर सिंह, अरुण सिंह, भिलाई चरोदा निगम पार्षद सत्यप्रकाश शर्मा मंचाशिन रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांताध्यक्ष प्रभूनाथ बैठा ने कहा कि आज का कार्यक्रम एक ऐतिहासिक कार्यक्रम है, बहुत ही कम समय में इसे ऑर्गनाइज किया गया है। इतनी बड़ी खुशी को टालना अच्छी बात नही है, अगर खुशी आए तो जरूर खुशी मानाना चाहिए। ये भोजपुरी परिषद के एकता का परिणाम है कि पिछली भूपेश सरकार ने लोक आस्था के महापर्व छठ पर शासकीय अवकाश की घोषणा की, मैं उन्हें भी धन्यवाद देता हूं की उन्होंने हमे सम्मान दिया।

श्री बैठा ने कहा कि अगर हम जाति व्यवस्था, धर्म में लिपटे रहे तो हमारा क्षेत्र पीछे हो जायेगा। हमारे मुख्य अतिथि अपना घर- द्वार छोड़ करके जगह- जगह यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, केरल, छत्तीसगढ़ और देश के कई हिस्सों में जा जाकर भोजपुरी भाषा को बचाने के लिए उसको अष्टम सूची में शामिल करने के लिए जो अपना त्याग और बलिदान दे रहे है उसकी जितनी भी तारीफ की जाए वो कम है, अगर ऐसे लोग आज नही होते तो भोजपुरी का नामों निशान मिट जाता। आगामी मकर संक्रांति पर परिषद द्वारा कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारी आज से ही शुरू की जाए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जनार्दन सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का आयोजन बहुत ही गर्व का विषय है, खिलाड़ी का सम्मान, पहलवान का सम्मान यही तो भोजपुरी का असली चीज है। भोजपुरी का असली चीज ही पहलवानी है, भोजपुरी का पहचान ब्रिटिश शासन से आजादी की लड़ाई से है, बंगाल के कलम और भोजपुरी का लाठी, भोजपुरिया लाठी का धनी है, अगर भोजपुरिया लोग एक जुट हो जाए और हुंकार भर दे तो सरकार के कान खड़े हो जाएंगे और भोजपुरी भाषा को मान्यता मिल जायेगी। भोजपुरी के लिए जीना है, भोजपुरी के लिए ही मरना है, जब तक जान है तब तक माटी के लिए लड़ना है।

वही कार्यक्रम में आरके पोद्दार, बीपी सिंह, मृत्युंजय भगत, संतोष साह, अरुण यादव, अरुण राय, आरएन सूर्यवंशी, सुभाष शर्मा, हरे राम विश्वकर्मा, आरएन पांडेय, पीएन शर्मा, मीना विश्वकर्मा, मंजू बैठा, निर्मला देवी, संतोष जायसवाल, सुरेंद्र शर्मा सहित बड़ी संख्या में भोजपुरी परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। बीपी सिंह ने आभार प्रकट किया तथा डॉ. सुचित्रा शर्मा ने मंच का संचालन किया साथ ही परिषद के  सदस्य मनोज का जन्मदिन भी मनाया गया।

इन्हे किया गया सम्मानित: (1) श्रीकांत पहलवान (टग ऑफ द वार) मुख्यमंत्री ट्राफी, (2) भगवान पहलवान (कुश्ती) शहीद बिनोद चौबे सम्मान, (3) सतेन्द्र यादव (कुश्ती) शहीद पंकज विक्रम सम्मान तथा भानुमती, श्याम झा, औरंगजेब, अजय और राहुल को रसाकशी के लिए पुरस्कृत किया गया।

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