दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने 25 गांवों में जमीन खरीदी बिक्री पर लगाया प्रतिबंध

दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा विगत 3 जून 2026 को जारी आदेश के माध्यम से दुर्ग जिले में प्रस्तावित ईस्ट एण्ड वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजना के निर्माण हेतु तहसील दुर्ग एवं पाटन के ग्रामो के निजी भूमि का खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी-बिक्री आदि को प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा और परियोजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश पर्यन्त अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किये जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया था।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आदेश में संशोधित करते हुुए उक्त आदेश की कंडिका-4 में उल्लेखित ग्रामों के स्थान पर दुर्ग तहसील अंतर्गत ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह, पाटन तहसील अंतर्गत ग्राम परेवाडीह, पहंडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह, बटंग एवं भिलाई-3 तहसील अंतर्गत सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा, उरला कुल 25 ग्राम शामिल किया है। आदेश की शेष शर्ते यथावत् रहेगी।

दुर्ग जिले में कचरा प्रबंधन को लेकर महा-अभियान शुरू, खुले में कचरा फेंकना और जलाना पूर्ण प्रतिबंधित

कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले को देश का सबसे स्वच्छ और आदर्श जिला बनाने के उद्देश्य से एक बड़े महा-अभियान की शुरुआत की गई है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील में पारित कड़े आदेशों और विगत 5 मई 2026 को जारी गाइडलाइंस के परिपालन में जिले के ग्रामीण इलाकों में ’ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ को पूरी कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब जिले में खुले में कचरा फेंकने, डंप करने, उसे जलाने या दबाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। नियमों की चौबीसों घंटे सख्त निगरानी करने और पर्यावरणीय मानकों को बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर एक ’विशेष टास्क फोर्स’ (समिति) का भी गठन किया गया है, जो कचरा प्रबंधन से जुड़े हर मोर्चे पर पैनी नजर रखेगी।

इस वृहद कार्ययोजना को धरातल पर उतारने के लिए जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के कड़े निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे के कुशल मार्गदर्शन में एक दिवसीय हाई-टेक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया गया। इस कार्यशाला में जनपद पंचायत दुर्ग, धमधा एवं पाटन की समस्त 300 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों समेत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) व स्वच्छ भारत मिशन के 300 से अधिक मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों (बीपीएम, एरिया कोऑर्डिनेटर, पीआरपी, एफएल सीआरपी, कृषि, पशु व पोषण सखियों) को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

रायपुर से ऑनलाइन जुड़े समर्थन संस्था के राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर देवीकिसन निमजे ने कचरा संग्रहण से लेकर उसके वैज्ञानिक निपटान की अचूक तकनीकों की जानकारी दी। इससे पूर्व विकासखण्ड स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों को इस अधिनियम के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिसमें तीनों जनपद पंचायत सीईओ ने सक्रिय भूमिका निभाई। नए नियमों के मुताबिक, जिले की तस्वीर बदलने के लिए 5 बड़े मोर्चों पर कड़ाई से काम किया जाएगा, जिसमें स्रोत से ही कचरे का पृथक्कीकरण, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कलेक्शन, वैज्ञानिक डिस्पोजल, पुराने डंपिंग यार्डों (लिगेसी वेस्ट) का खात्मा और स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाना शामिल है।

आम नागरिकों के लिए अब अपने घरों से निकलने वाले कचरे को 4 श्रेणियों (गीला, सूखा, सेनेटरी वेस्ट और स्पेशल केयर वेस्ट) में बांटकर देना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों या जल स्रोतों पर कचरा फेंकने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, अब बिना स्थानीय निकाय की पूर्व अनुमति के 100 से अधिक व्यक्तियों का कोई भी आयोजन नहीं किया जा सकेगा, और बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों (बल्क वेस्ट जनरेटर्स) को ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराकर अपने गीले कचरे के निपटान के लिए स्वयं कंपोस्टिंग या बायोमीथनेशन प्लांट लगाने होंगे।

 

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