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जी-राम-जी से 48.76 करोड़ रुपए की मजदूरी का भुगतान: दुर्ग-धमधा-पाटन में 9568 श्रमिकों को मिल रहा रोजगार

दुर्ग। गांवों में रोजगार के साथ विकास की रफ्तार भी तेज हो रही है। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी जी-राम-जी के तहत दुर्ग जिले में मजदूरों को काम देने के साथ गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियां तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत अब तक 4,875.73 लाख रुपये यानी करीब 48.76 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान किया जा चुका है।

जिले के दुर्ग, धमधा और पाटन जनपद पंचायतों में वर्तमान में कुल 9,568 श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें धमधा में 4,365, दुर्ग में 3,346 और पाटन में 1,857 श्रमिक शामिल हैं। योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है। ग्रामीण ग्राम पंचायत के माध्यम से काम की मांग कर सकते हैं। मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मजदूरी भुगतान को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए सिंगल नोडल अकाउंट (SNA) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) द्वारा राशि श्रमिकों के बैंक अथवा डाकघर खातों में भेजी जा रही है। स्वीकृत कार्यों और भुगतान की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि श्रमिकों को समय पर मजदूरी का लाभ मिल सके। जनपदवार भुगतान में पाटन में 1,782.01 लाख रुपये, दुर्ग में 1,602.23 लाख रुपये और धमधा में 1,400.40 लाख रुपये की मजदूरी का भुगतान किया गया है।

योजना के तहत तालाब, डबरी और जल निकासी जैसे कार्यों से वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, स्कूल, आंगनबाड़ी और शौचालय निर्माण से ग्रामीण अधोसंरचना मजबूत होगी। इन कार्यों से एक ओर ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर गांवों में लंबे समय तक उपयोगी परिसंपत्तियां तैयार होंगी।

कलेक्टर अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में स्वीकृत कार्यों की नियमित समीक्षा और गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। जिला पंचायत का लक्ष्य रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देना और ग्रामीणों को टिकाऊ परिसंपत्तियों का लाभ उपलब्ध कराना है।

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