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आज नवरात्रि का नौवां दिन: महानवमी पर करे मां सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजन और हवन

नवरात्र के अंतिम दिनों में हवन करके पूजा का समापन करने की परंपरा है.  हवन में मंत्रोच्चार के साथ आहुति दी जाती है.  घर पर हवन करते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें और जरूरत पड़ने पर पुरोहित की सहायता लें. नवरात्र का व्रत रखने वाले श्रद्धालु कन्या पूजन और हवन के बाद पारण करते हैं.  हालांकि, व्रत खोलने का समय अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं के अनुसार बदल सकता है.  कुछ लोग नवमी की पूजा के बाद पारण करते हैं, जबकि कुछ दशमी को व्रत खोलते हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। शारदीय नवरात्र में आज, 19 अक्टूबर 2026 को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान किए जा रहे हैं. तिथियों के संयोग के कारण इस बार दोनों दिन की पूजा एक ही दिन की जा रही है. महाअष्टमी पर मां महागौरी और महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है. इस दौरान कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का भी विशेष महत्व है. जो लोग अष्टमी के अनुसार कन्या पूजन करते हैं, वे आज पूजा कर सकते हैं. वहीं, नवमी पर कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु भी आज अनुष्ठान कर सकते हैं।

आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी.  इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के स्पर्श के कारण महाअष्टमी 19 अक्टूबर को मनाई जा रही है. संयोगवश नवमी तिथि भी इसी दिन मान्य है।

कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
नवरात्र में अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों पर कन्या पूजन करने की परंपरा है. 19 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी के कन्या पूजन के लिए शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. पहला शुभ मुहूर्त अमृत काल में रहेगा, जो कि सुबह 7 बजकर 28 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहने वाला है. इसके बाद आप सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में भी कन्या पूजन कर सकते हैं. मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर संभव है इसलिए पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर कर लें।

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की आराधना
नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां सिद्धिदात्री ज्ञान, विवेक और सिद्धि प्रदान करने वाली देवी हैं. महानवमी पर हवन और कन्या पूजन करने की भी परंपरा है।

मां सिद्धिदात्री का मंत्र
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

पूजा विधि: मां सिद्धिदात्री को फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. देवी को सफेद तिल से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है. इसके बाद मंत्र का जाप और आरती करें. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार हवन भी कर सकते हैं।

मां सिद्धिदात्री की कृपा पाने के उपाय
– मां को सुगंधित फूल अर्पित करें.
– पूजा के दौरान मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें.
– अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

कन्या पूजन की विधि
नवरात्रि में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है.  कन्या पूजन के लिए सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें.  कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर स्वच्छ आसन पर बैठाएं.  उनके पैर धोकर तिलक लगाएं और भोजन कराएं।

परंपरागत रूप से हलवा, पूड़ी और काले चने का प्रसाद तैयार किया जाता है. भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा या उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें.  कुछ परिवारों में एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर भोजन कराने की परंपरा भी है।

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