दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

अपना प्रोडक्ट तैयार कर देश-विदेश में कार एसेसरीज सप्लाई करने वाली छत्तीसगढ़ की पहली कम्पनी बनी कारफी, पहली बार मे लाखो का नुकसान होने के बाद भी आनंद विश्वकर्मा ने नही मानी हार, दोबार शुरू कर बनाई अपनी अलग पहचान

भिलाई। अक्सर देखा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति नया बिजनेस शुरू करता है और उसे सफलता मिलती है तो उसकी चर्चा हर जुबान पर होती है लेकिन अगर बिजनेस ना चले तो उस बिजनेस में लगे पैसे के साथ साथ उस व्यक्ति का हौसला भी टूट जाता है और वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है, टूट जाता है लेकिन इस्पात नगरी भिलाई का एक ऐसा नवजवान बिजनेसमैन है जो नया बिजनेस शुरू किया लेकिन उसे सफलता नही मिली और शुरुआती दौर में ही उसे लाखो रुपये का नुकसान हो गया।

इसके बाद भी आनंद विश्वकर्मा ने हार नही मानी और अपने लग्न और मेहनत से बिजनेस को फिर से खड़ा ही नही किया बल्कि उसको एक नई ऊंचाई प्रदान की है जो कि आज चर्चे का विषय है और उन लोगो के लिए प्रेरणा है जो शुरुआती असफलता पर ही हार मानकर निराश हो जाते है।

तीन साल पहले बिजनेस में लाखों का घाटा होने के बाद दोबारा उसे अलग तरीके से खड़ा करना आसान नहीं होता लेकिन आनंद ने अपने यूनिक आइडिया से बिजनेस को नया रूप देकर खुद की कंपनी खड़ी कर ली और उस कंपनी ने कोविड लॉकडाउन के दौरान ही अपना बिजनेस कुछ इस तरह किया कि मात्र दो साल में ही कंपनी का टर्न ओवर 2 करोड़ तक पहुंच गया।

आनंद विश्वकर्मा का मानना है कि जब हम मुश्किलों से घिर जाते हैं, तो हमें मुश्किलें बड़ी लगने लगती है, लेकिन जब इसके समाधान की ओर देखते हैं तो यही मुश्किल आसान हो जाती है। उन्होंने भी अपने बुरे दिनों में अपनी कमजोरी को ही ताकत बनाया और वह कर दिखाया जिसका सपना उन्होंने देखा था। कार एसेसरीज की उनकी कंपनी कारफी छत्तीसगढ़ की पहली कंपनी है जो अपना प्रोडक्शन कर प्रोजक्ट तैयार कर रही है।

 

इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर, केरल, ओडि़शा सहित कई प्रदेशों में उनके तैयार किए प्रोजक्ट के आउटलेट भी खुलने जा रहे हैं, भारत ही नही अब तो भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों से भी वे अपना बिजनेस करने जा रहे हैं। मात्र 26 साल के आनंद ने छोटी सी उम्र में बड़ा तर्जुबा हासिल कर दो कमरों से शुरू किए बिजनेस को वेयर हाउस तक पहुंचाया। आनंद अब 15 और लोगों को रोजगार देकर उन्हें भी मदद कर रहे हैं।

लाखों रुपये का था कर्ज

आनंद ने 2017 में कार एसेसरीज का बिजनेस शुरू किया था, लेकिन डेढ़ साल के अंदर उन पर न सिर्फ लाखों का कर्ज हो गया, बल्कि कुछ लीगल केस भी हो गए। उनकी दुकान बिक गई और मुश्किल से वे कर्ज चुका पाए, लेकिन उन्होंने उस वक्त ही ठान लिया कि इसमें दोबारा आगे बढ़कर दिखाएंगे। बस क्या था इस बार उन्होंने थोड़ी अलग प्लानिंग की और मार्केट सर्च किया। दूसरों की कंपनी की एसेसरीज बेचने की बजाए उन्होंने खुद का प्रोडक्शन शुरू किया। 10 लाख की लागत से कंपनी कारफी प्राइवेट लिमिटेड शुरू की। पर इसके लिए पैसे जुगाडऩे उन्हें अपनी प्रॉपटी बेचनी पड़ी।

लॉकडाउन को बनाया अवसर

अक्टूबर 2019 को कंपनी शुरू की तो चंद महीने में ही लॉकडाउन लग गया लेकिन यह लॉकडाउन उनके लिए एक अवसर बनकर आया क्योंकि इस दौरान उनके प्रोडेक्ट के लिए रॉ मटेरियल चीन से लेना था लेकिन लॉकडाउन के पहले चीन की कंपनी छोटे आर्डर नहीं लेती थी, पर कोविड के आने के बाद वही कंपनी छोटे आर्डर लेने लगी। बस क्या था उन्होंने इस मौके का फायदा उठाकर माल मंगवाया और अपना काम शुरू किया। प्रदेश के डीलर्स को पहली बार में ही उनके प्रोडक्ट, पैकेजिंग सबकुछ इतना पसंद आया कि उनके सामान की मांग दूसरे प्रदेशों में भी होने लगी। आज देश के 20 से ज्यादा राज्यों में उनकी कंपनी के प्रोडक्ट बिकते हैं।

अधूरी छोड़ी सिविल इंजीयरिंग की पढ़ाई

आनंद बताते है कि घरवाले चाहते थे कि वे सिविल इंजीनियर बने, पर उनका मन तो खुद के बिजनेस में लगा था। बचपन में किसी कंपनी के प्रोडक्ट पर प्राइवेट लिमिटेड शब्द पढ़ा था, पर उसका मतलब नहीं पता था, पर जब मतलब समझ आया तो मन उसी में लग गया। उन्होंने कहा कि जीवन में बिना संघर्ष के सफलता नहीं मिलती और असफल होने पर जो हौसला बनाए रखता है, वह सफल होकर ही रहता है।

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