दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

जिला पंचायत CEO अश्विनी देवांगन ने अधिकारियों की ली बैठक, कहा- गौठानों के बेहतर संचालन के लिए पैरादान अभियान को सफल बनायें

दुर्ग। एनजीजीबी को लेकर अपनी पहली समीक्षा बैठक जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन ने की। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य गौठानों को पूरी तरह स्वावलंबी बनाकर इन्हें आजीविकामूलक गतिविधियों का केंद्र बनाना है। इस दिशा में अब तक आप लोगों ने क्या प्रगति लाई है इसकी जानकारी दें। सभी सीईओ ने बताया कि अभी धान कटने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। लोगों से लगातार अपील की जा रही है कि पैरादान करें ताकि आपका गौठान बेहतर तरीके से संचालित हो। सीईओ ने कहा कि कलेक्टर के निर्देश पर तीन सर्वश्रेष्ठ गांवों का चिन्हांकन भी किया जाएगा। जहां पैरादान का काम सबसे बेहतर हुआ है। ऐसे में सभी जनपद सीईओ के लिए बेहतर अवसर है कि सर्वश्रेष्ठ कार्य संपादित करें।

श्री देवांगन ने कहा कि गौठानों को स्वावलंबी बनाने के साथ ही उनमें तेजी से आर्थिक विकास के अवसर पैदा करना है। इसके लिए रोजगार ठौर के रूप में इन्हें विकसित करना है। इन रोजगार ठौर की क्षमता तब और बढ़ेगी जब परंपरागत साधनों के साथ ही हम नये प्रयोग भी करेंगे। नवाचार करेंगे। ऐसे नवाचार जिसकी क्षेत्र में विशेष जरूरत हो। उन्होंने कहा कि मछली पालन जैसे कार्यों के लिए भी प्रशासन की ओर से बड़ी सहायता दी जा रही है। हमें समूहों को इसके लिए तैयार करना है। साथ ही इसे करने के लिए विशेषज्ञता भी प्रदान करनी होगी।

एक बार अच्छा नतीजा मिलेगा तो समूह हमेशा के लिए इसे अपनायेगा और भविष्य में दूसरे समूहों के लिए भी राह खुलेगी। मत्स्यपालन, मुर्गीपालन, बटेरपालन जैसे उद्यमों में मार्केट बहुत बड़ा है और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से थोड़े से ही निवेश में पर्याप्त आमदनी है। डीएमएफ आदि साधनों के माध्यम से प्रशासन द्वारा इनके लिए काफी इनपुट सब्सिडी दी जा रही है। इसका लाभ उठाना चाहिए। सीईओ ने नरवा प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि प्रथम चरण के उदाहरण हमारे सामने हैं हमने एरिया में ट्रीटमेंट किया और कमाल हुआ, भूमिगत जल के स्तर में काफी वृद्धि हुई। अब चौनल ट्रीटमेंट पर भी फोकस है। भूमिगत जल स्तर बढ़ने से दूसरी फसल को लेकर जलस्तर का संकट दूर हो जाएगा जो कृषि आय बढ़ाने की दृष्टि से बड़ा कदम होगा। उन्होंन कहा कि सामुदायिक बाड़ियों और निजी बाड़ियों पर भी काम करने की जरूरत है। एनजीजीबी ऐसी योजना है जिसमें पूरी तरह से समग्र विकास की संभावनाएं बनती हैं।

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