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दहेज प्रताड़ना केस पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- घर का हर व्यक्ति नहीं हो सकता आरोपी

सत्र अदालत ने उच्चतम न्यायालय के 8 फरवरी 2022 के कहकसन कौसर उर्फ सोनम एवं अन्य बनाम बिहार राज्य से संबंधित एक मामले के अलावा छह और निर्णयों को अपने फैसले का आधार बनाया…

नईदिल्ली (ए)। दहेज प्रताड़ना के लिए ससुराल का हर सदस्य आरोपी नहीं हो सकता। यदि शिकायतकर्ता आरोप लगाती है तो इसके लिए उसे ऐसे सबूत भी देने होंगे, जो संबंधित परिवार के सदस्य की प्रताड़ना को साबित करते हों। हर छोटी कहासुनी को प्रताड़ना नहीं कहा जा सकता। अदालत ने यह अहम टिप्पणी एक महिला के ससुर को दहेज प्रताड़ना व भरोसे के आपराधिक हनन के आरोप से मुक्त करते हुए की।

तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दहेज प्रताड़ना कानून इसलिए बनाया गया ताकि महिला को ससुराल में प्रताड़ना से सुरक्षा मिल सके। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस कानून के दुरुपयोग की बाढ़ सी आ गई है। खुद देश के वरिष्ठ न्यायालय समय-समय पर इस बात का उल्लेख अपने निर्णयों में कर चुके हैं कि शादी के बाद छोटी-मोटी नोकझोंक में न सिर्फ ससुराल पक्ष के प्रत्येक सदस्य, बल्कि दूसरे रिश्तेदारों को भी दहेज प्रताड़ना के झूठे मामलों में फंसा दिया गया। वे आखिर में साक्ष्यों के अभाव में बरी तो हो गए लेकिन उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहनी पड़ी।

चांदनी चौक इलाके में रहने वाली महिला ने चार साल पहले 2018 में पति व सास-ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व भरोसे के आपराधिक हनन का मुकदमा दर्ज कराया था। निचली अदालत ने आरोप तय कर दिए गए थे। निचली अदालत के इस निर्णय को सास-ससुर की तरफ से सत्र अदालत में चुनौती दी गई थी। सत्र अदालत ने निचली अदालत के निर्णय में बदलाव कर दिया है।

सास पर लगे इल्जाम पर आरोप किए तय
अदालत ने शिकायतकर्ता महिला की सास पर दहेज प्रताड़ना और भरोसे के आपराधिक हनन के तहत आरोप तय किए हैं। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला की सास पर लगे आरोपों को लेकर अभियोजन पक्ष के पास प्रथमदृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं। शिकायतकर्ता ने प्रताड़ना का समय, तरीका और निर्धारित तारीख का उल्लेख किया है। ऐसे में सास पर आरोप बनते हैं। जबकि ससुर के लिए सिर्फ यह कह देना पर्याप्त नहीं है कि शिकायतकर्ता ने उनसे पति की शिकायत की और उन्होंने यह कह दिया था कि उनका बेटा जो कर रहा है वह सही है।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय को बनाया आधार सत्र अदालत ने उच्चतम न्यायालय के 8 फरवरी 2022 के कहकसन कौसर उर्फ सोनम एवं अन्य बनाम बिहार राज्य से संबंधित एक मामले के अलावा छह और निर्णयों को अपने फैसले का आधार बनाया। सत्र अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने गहरी चिंता जाहिर करते हुए स्पष्ट तौर पर अपने फैसले में कहा था कि दहेज प्रताड़ना कानून का दुरुपयोग हो रहा है। पति के रिश्तेदारों को झूठे दहेज प्रताड़ना के मामलों में फंसाने का चलन सा बन गया है।

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