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द्रौपदी मुर्मू या यशवंत सिन्हा, कौन होगा देश का 15वां राष्ट्रपति? बैलेट बॉक्स में बंद हुई ‘किस्मत’, जमकर हुई क्रॉस वोटिंग

देश के 15वें राष्ट्रपति के लिए चुनाव संपन्न हो गए हैं, 21 जुलाई को पता चल जाएगा कि कौन देश का अगला राष्ट्रपति होगा, चुनाव में 4 हजार से ज्यादा सांसदों और विधायकों ने भाग लिया, जमकर हुई क्रॉस वोटिंग…

 

नईदिल्ली (ए)। देश के 15वें राष्ट्रपति के लिए चुनाव संपन्न हो गए हैं। इस दौरान ओडिशा से असम तक क्रॉस वोटिंग देखने को मिली। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी क्रॉस वोटिंग हुई। यूपी में बरेली के सपा विधायक शहजील इस्लाम ने पार्टी लाइन से हटकर द्रौपदी मुर्मू को वोट किया। बता दें कि मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ था और शाम के 5 बजे तक चला। एनडीए की तरफ से द्रौपदी मुर्मू तो विपक्ष की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंति सिन्हा मैदान में हैं।

मतपेटी में कैद हुई किस्मत दोनों ही उम्मीदवारों की किस्मत मत पेटी में कैद हो गई है। हालांकि माना जा रहा है कि द्रौपदी मुर्मू की जीत सुनिश्चित है। एनडीए के घठक दलों के साथ बीजू जनता दल, जेडीयू और शिवसेना जैसे क्षेत्रीय दलों ने भी मुर्मू के समर्थन में मतदान किया है। वहीं क्रॉस वोटिंग भी जमकर देखने को मिली। बताया जा रहा है कि असम में लगभग 20 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की।

बता दें कि 27 दलों के समर्थन के साथ द्रौपदी मुर्मू का पलड़ा भारी है। वहीं यशवंत सिन्हा को करीब 14 दलों का समर्थन मिला है। वहीं क्रॉस वोटिंग ने भी खेल बिगाड़ दिया है। 21 जुलाई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा। दरअसल राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

जमकर हुई क्रॉस वोटिंग, पवार, सोनिया और अखिलेश नहीं संभाल पाए अपना कुनबा

राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद और देश के सभी राज्यों की विधानसभाओं में मतदान जारी है। एनडीए ने एक तरफ अपना कुनबा इस चुनाव में मजबूत करके दिखाया है तो वहीं विपक्षी खेमे को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा है। गुजरात से लेकर यूपी तक में एनसीपी, कांग्रेस और सपा में फूट देखने को मिली है। गुजरात में एनसीपी के विधायक कांधल एस. जडेजा ने पार्टी के रुख से अलग एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में वोट दिया। उन्हें लेकर पहले ही आशंका जताई जा रही थी कि वह पार्टी से अलग रुख अपना सकते हैं। एनसीपी ने यशवंत सिन्हा के समर्थन का ऐलान किया था। इसके अलावा झारखंड से एनसीपी विधायक कमलेश सिंह ने भी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट डाल दिया। उन्होंने मतदान के बाद कहा कि मैंने अपनी अंतरात्मा के आवाज पर द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोट डाला है।

यही नहीं गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के नेता छोटूभाई वसावा ने भी द्रौपदी मुर्मू को ही वोट किया है। उन्होंने कहा कि मैंने ऐसी नेता को वोट दिया है, जिसने गरीबों को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को भी राष्ट्रपति चुनाव में फूट का सामना करना पड़ा है। एक तरफ अखिलेश यादव के चाचा और प्रसपा प्रमुख शिवपाल यादव ने खुलेआम द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया है तो वहीं सपा के अपने ही विधायक शहजील इस्लाम ने भी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया है। बरेली के भोजीपुरा से पार्टी विधायक शहजील इस्लाम बीते कुछ वक्त से पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे।

शिवपाल यादव ने तो पहले ही साफ कर दिया था कि वह ऐसे शख्स को वोट नहीं करेंगे, जिसने एक दौर में मुलायम सिंह यादव को आईएसआई एजेंट करार दिया था। कांग्रेस भी राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग रोकने में फेल रही है। ओडिशा से पार्टी के विधायक मोहम्मद मुकीम ने भी एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार को वोट दिया है। ओडिशा कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि मुकीम को खुद को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के लिए दावेदारी कर रहे थे। लेकिन ऐसा नहीं होने से वह पार्टी से नाराज थे। झारखंड में भी कांग्रेस के विधायकों की ओर से क्रॉस वोटिंग करने की आशंका है।

कुलदीप बिश्नोई बोले- अंतरात्मा की आवाज पर डाल दिया वोट हरियाणा में भी कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का सामना करना पड़ा है। पार्टी के विधायक कुलदीप बिश्नोई ने द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में वोटिंग की है। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज को सुनते हुए मतदान किया है। इससे पहले राज्यसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस की बजाय भाजपा समर्थित कैंडिडेट को वोट दिया था।

नियम के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव में कोई भी पार्टी मतदान के लिए व्हिप नहीं जारी कर सकती। सभी विधायकों और सांसदों को अपनी मर्जी के मुताबिक किसी भी कैंडिडेट को वोट देने का अधिकार होता है। हालांकि परंपरागत तौर पर लोग अपनी पार्टी लाइन के आधार पर ही मतदान करते हैं। ऐसे में क्रॉस वोटिंग किसी भी पार्टी के लिए एक झटके के तौर पर ही देखी जाती है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में यूपी सबसे बड़ा फैक्टर है। सूबे के 403 विधायक हैं और सभी के वोट का मूल्य 208 है, जो देश के किसी अन्य राज्य के मुकाबले ज्यादा है।

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