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भिलाई इस्पात संयंत्र के टी एंड डी विभाग में जीपी डब्लू आई एस रेक और 140 टन रेल क्रेन का हुआ उद्घाटन

भिलाई। विगत दिनों सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा खरीदे गए जीपी डब्लू आई एस रेक और 140 टन क्षमता रेल क्रेन का विधिवत उद्घाटन T&D विभाग में सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी अनिर्बन दासगुप्ता द्वारा कार्यपालक निदेशक (संकार्य) अंजनी कुमार, कार्यपालक निदेशक (वित्तीय) डॉक्टर ए के पन्डा, विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधकों और महाप्रबंधकों की उपस्थिति में किया गया।

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने बीओबीएसएनएम1 वैगनों के चार जीपीडब्ल्यूआईएस रेक के लिए ऑर्डर दिया है। इसमें पहला रेक प्राप्त हो गया है और कमीशन कर दिया गया है। अन्य तीन रेक की भी आने वाले महीनों में आपूर्ति हो जाने की उम्मीद है। जीपीडब्ल्यूआईएस (सामान्य प्रयोजन वैगन निवेश योजना) भारतीय रेलवे की एक योजना है जिसमें समझौते के अनुसार माल ढुलाई में छूट, बीएसपी साइडिंग में कोई विलंब शुल्क नहीं और रेलवे द्वारा वैगनों के रखरखाव जैसे लाभ शामिल हैं। इन रेकों का उपयोग बीएसपी द्वारा सेल आरएमडी खानों मेघाहाताबुरु, किरिभुरु आदि में से बीएसपी तक लौह अयस्क और वापसी यात्रा पर बेल्हा से राउरकेला इस्पात संयंत्र तक डोलोमाइट अयस्क के परिवहन के लिए किया जाएगा।

बीएसपी ने भारतीय रेलवे की जमालपुर वर्कशॉप से 140 टन क्षमता की रेल क्रेन को भी खरीदा है। इस क्रेन का उपयोग लोडेड वैगनों के डिरेलमेंट की स्तिथि में या भारी उपकरणों को उठाने के कार्य लिए किया जाएगा। क्रेन की मुख्य विशेषताओं में हाइड्रॉलिक रूप से नियंत्रित कार्य प्रणाली है (ब्रेक सिस्टम के अलावा)। इस क्रेन में सुरक्षित लोड संकेतक और लोडेड वैगन हैंडलिंग का प्रावधान है। जिब रेस्ट, मेन हॉइस्ट और ऑक्ज़ीलरी हॉइस्ट हुक असेंबली रखने, काउंटर वेट स्लैब रखने और लिफ्टिंग टैकल रखने के लिए एक मैच ट्रक भी प्रदान किया गया है।

निदेशक प्रभारी ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान परिदृश्य में इस रेक का बेहद महत्व है, इसकी उपलब्धता से संयंत्र को कच्चा माल समय पर प्राप्त हो सकेगा। निदेशक प्रभारी ने 140 टन रेल क्रेन जैसे आपातकालीन उपकरण रखने के महत्व पर भी जोर दिया जिससे संयंत्र को लाभ होगा और साथ ही दूसरों की आवश्यकता को भी पूरा किया जा सकेगा।

यह उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन टी एंड डी विभाग के लोको रिपेयर शॉप में सीजीएम प्रभारी (सर्विसेज) और जीएम प्रभारी (यातायात) और टी एंड डी विभाग के अन्य अधिकारियों के मार्गदर्शन में किया गया था।

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