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भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक भारत दौरे पर, पीएम मोदी से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की

भूटान के किंग ने नई दिल्ली में महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट की यात्रा के दौरान विजिटर बुक पर साइनर किए…

नईदिल्ली (ए)। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक सोमवार 3 अप्रैल से भारत के आधाकारिक दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार 4 अप्रैल को भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ आर्थिक सहयोग सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

इस मुलाकात को लेकर पीएम ने ट्वीट किया,” महामहिम भूटान नरेश, जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का स्वागत करते हुए खुशी हुई. हमारी गर्मजोशीपूर्ण और कामयाब बैठक हुई. भारत-भूटान रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हमारी गहरी दोस्ती और लगातार ड्रक ग्यालपोस के नजरिए को बेहद अहमियत देते हैं।

दरअसल ड्रक ग्यालपोस भूटान साम्राज्य के राज्य के प्रमुख होते हैं. इसे द्ज़ोंग्खा जबान में, भूटान को ड्रुक्युल के नाम से जाना जाता है जिसका अनुवाद “थंडर ड्रैगन की जमीन” के तौर पर किया जाता है. इस वजह से भूटान के राजाओं को ड्रुक ग्यालपो के नाम से जाना जाता है, भूटानी लोग खुद को द्रुक्पा कहते हैं, जिसका मतलब है “ड्रुक के लोग”।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन में महामहिम भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक का स्वागत किया। भूटान के राजा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के निमंत्रण पर ही 5 अप्रैल तक भारत के दौरे पर हैं. उनका भारत का ये दौरा काफी लंबे वक्त से तय था।

थिम्फू पर अपना असर बढ़ाने के चीन की कोशिशों पर नई दिल्ली में कुछ फिक्र के बीच पड़ोसी देश के राजा ने सोमवार को भारत की अपनी यात्रा शुरू की थी।

डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग की कुछ टिप्पणियों को कई लोगों ने हिमालयी राष्ट्र के बीजिंग के साथ घनिष्ठता के तौर पर देखा है. हालांकि भूटान ने कहा कि सीमा विवाद पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

इस वजह से भी भूटान नरेश की भारत के इस दौरे का अपना महत्व है. ये बात भी दीगर है कि नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए खुद भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर पहुंचे थे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार (3अप्रैल) को नई दिल्ली में भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के आगमन पर उनकी अगवानी की थी।

भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने राजघाट पर महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर भी गए. उन्होंने वहां जाकर राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि दी।

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