दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

अंदर की बात महाराज के साथ: दोनों ही दल के कार्यकर्ता और टिकट के चाहने वाले इन दिनों अपनी ताकत दिखाने पर आमादा

कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल के कार्यकर्ता और टिकट के चाहने वाले इन दिनों अपनी ताकत दिखाने पर आमादा है कांग्रेस में जहां खुलेआम नेता बड़े नेताओं को रिझाने के लिए अपनी ताकत दिखा रहे हैं गुलदस्ता देकर फोटो खींचा रहे हैं जिंदाबाद के नारे बुलन्द करवा रहे है शक्ति प्रदर्शन भी जोरो पर है तो वहीं भाजपा में भी टिकट चाहने वाले नेताओं ने अपने बड़े नेताओं की परिक्रमा और दिल्ली दौड़ शुरू कर दी है सच कह रहा हूं इन दिनों रायपुर से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट की लगभग सभी सीटे हाउसफुल चल रही है।

कई नेता तो पिछले 10 दिनों से दिल्ली में डेरा जमाए बैठे हैं लेकिन कांग्रेस में माहौल कुछ और ही है यहां लोकतांत्रिक तरीके से टिकट देने का वादा किया गया एक एक सीट पर कई कई लोगों ने आवेदन भर दिए लेकिन ब्लॉक अध्यक्ष पांच लोगों का पैनल बनाकर जिला अध्यक्ष को देंगे और जिला अध्यक्ष तीन लोगों का नाम पैनल बनाकर पीसीसी को सौंपेंगे लेकिन ओस लोकतांत्रिक पद्दति को धज्जियां उड़ते देखी जा सकती है इसके कारण कई टिकट के चाहने वालों में खासी नाराजगी है उनका कहना है कि यदि जिला अध्यक्ष से उनके संबंध मधुर नहीं है तो क्या इसका मतलब यह माना जाए कि जिला अध्यक्ष उनके नाम को ऊपर नहीं भेजेंगे…

नाम ना बताने की शर्त पर कांग्रेस के 40 से ज्यादा लोगों ने सीधे तौर पर स्थानीय विधायको शहर जिला अध्यक्षों पर कई आरोप लगाए उन्होंने कहा है कि शहर या जिला अध्यक्ष से जिनके संबंध मधुर होंगे या जिनकी कृपा से उक्त व्यक्ति अध्यक्ष बने होंगे वह तो उन्हीं का नाम आगे भेजेंगे हम जैसे झंडा उठाने वाले आम कार्यकर्ताओं का नाम आगे थोड़ी ना भेजा जाएगा….बात भी सही है जिस तरह वैशाली नगर से 73 लोगों ने नाम भरा है उसमें से कम से कम 12 ऐसे चेहरे हैं जो दो दशक से तो कुछ तीन-तीन दशक से कांग्रेस पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता है यही हाल दुर्ग शहर का भी है जहां लगभग 21 लोगों ने विधानसभा टिकट पाने के लिए आवेदन दिया है।

यह पहली बार हो रहा है कि सूबे के सबसे ताकतवर घराने के खिलाफ चुनाव लड़ने की हिमाकत इन 21 लोगों ने दिखाई है वरना पहले नाम तय होता था की टिकट एक ही व्यक्ति को मिलेगी लेकिन इस बार इन 21 लोगों ने टिकट मांग कर यह जाता दिया है कि घराने का प्रभाव समाप्त होते जा रहा है इन दावेदारों में कई दावेदार तो पांच दशक से कांग्रेस पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता है तो कुछ दो-तीन दशक से भी पार्टी में हैं कुछ अभ्यर्थी तो ऐसे हैं जो हाल फिलहाल में ब मुश्किल 8 साल से ही कांग्रेस के कार्यकर्ता बने हैं लेकिन फिर भी दावेदारी कर रहे हैं कार्यकर्ताओ का कहना है कि जब टिकट तय है और सब कुछ ऊपर से ही होना है तो फिर इतने लोकतांत्रिक तरीके का दिखावा क्यों किया जा रहा है ?

हर बार की तरह इस बार भी प्रत्याशी थोप दिया जाता और पार्टी का काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ता उन्हें जिताकर ले आते लेकिन लोकतांत्रिक पद्धति कहकर अन्य अभ्यर्थियों का मखौल उड़ाया जा रहा है यकीन मानिए कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जगह एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है..बाकी टिकट तो तय है लेकिन कोंग्रेस की इस बार जीत आसान नही…अंदर की बात में इतना ही बाकी जुड़े रहे मेरे साथ…

लेख- हितेश शर्मा

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