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शांति निकेतन परिसर की सड़क वापस दिलवाने की मांग को लेकर कुलपति ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

राष्ट्रपति को लिखे पत्र में विश्वभारती के कुलपति ने दावा किया कि सड़क के दोनों किनारों पर खड़े ई-रिक्शा से पर्यटकों की आवाजाही में दिक्कतें आती हैं। आश्रम से सटी सड़क पर अस्थायी दुकानें लगने लगी हैं…

नईदिल्ली (ए)। केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर में विरासत भवनों से घिरी सड़क को पश्चिम बंगाल सरकार से वापस लेने के लिए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की गई। विश्व भारती कुलपति ने मामले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर यह मांग की। राष्ट्रपति को लिखे पत्र के मुताबिक विश्वभारती के कुलपति विद्युत चक्रवती ने शांतिनिकेतन में अपने परिसर में सड़क की वापसी के लिए उनका समर्थन मांगा है। जिसे पिछले महीने यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रुप में मान्यता दी गई थी।

विद्युत चक्रवर्ती ने पत्र में दावा किया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुताबिक यदि भारी वाहनों को सामना ढुलाई के लिए सड़क पर चलने की अनुमति दी जाती है, तो सड़क किनारे मौजूद ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान हो सकता है। पत्र में वीसी ने दावा किया कि सड़क के दोनों किनारों पर खड़े ई-रिक्शा से पर्यटकों की आवाजाही में दिक्कतें आती है। आश्रम से सटी सड़क पर अस्थायी दुकानें लगने लगी हैं।

राज्य लोक निर्माण विभाग ने बेहतर कनेक्टिविटी के नाम पर 2020 में विश्वविद्यालय से पोस्ट ऑफिस मोर को श्रीनिकेतन से जोड़ने वाली तीन किलोमीटर की सड़क को ले लिया था। विश्व भारती के अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से संस्थान के लिए सड़क की वापसी के अनुरोध पर विचार करने का आग्रह किया था। हालांकि कोई जवाब नहीं मिला।

उन्होंने राष्ट्रपति से सड़क को वापस लेने के विश्वविद्यालय के प्रयास में सहयोग करने का आग्रह किया, जो इसे इसके रखरखाव के लिए संरक्षणवादियों के परामर्श से योजनाएं तैयार करने में सक्षम बनाएगा।

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