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जापानी विदेश-रक्षा मंत्री ने पीएम मोदी से की मुलाकात, आज राजनाथ सिंह और एस जयशंकर से होगी द्विपक्षीय वार्ता

जापान के विदेश और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर आज यानी मंगलवार को अपने जापानी समकक्षों किहारा माइनोरू और कामिकावा के साथ वार्ता करेंगे…

 

नईदिल्ली (ए)। जापान के विदेश मंत्री योको कामिकावा और रक्षा मंत्री किहारा मिनोरू सोमवार को भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यहां वह तीसरी भारत-जापान ‘2+2’ वार्ता आयोजित करेंगे, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करने और द्विपक्षीय रणनीतिक विस्तार के तरीकों का पता लगाने की उम्मीद है। इस बीच, जापान के विदेश और रक्षा मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को अपने जापानी समकक्षों किहारा माइनोरू और कामिकावा के साथ वार्ता करेंगे।

भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘मजबूत भारत-जापान रक्षा साझेदारी मौजूदा वैश्विक माहौल में स्वतंत्र, खुले, समावेशी और समृद्ध इंडो-पैसिफिक संबंध सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।’ उम्मीद है कि दोनों पक्ष क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने पर विचार करेंगे।

वहीं, जापानी मंत्रियों से मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘तीसरी भारत-जापान 2+2 वार्ता से पहले जापानी विदेश मंत्री कामिकावा योको और रक्षा मंत्री किहारा मिनोरू से मिलकर खुशी हुई। भारत-जापान रक्षा और सुरक्षा संबंधों में हुई प्रगति का जायजा लिया।’ कहा, उन्होंने हिंद-प्रशांत और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में भारत-जापान साझेदारी की भूमिका की पुष्टि की।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘द्विपक्षीय वार्ता और ‘2+2′ बैठक के दौरान, विदेश और रक्षा मंत्री द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा करेंगे। दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए नई पहल का पता लगाएंगे।’ इसके अलावा, मंत्री आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
‘2+2’ संवाद पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, ‘भारत-जापान बहुआयामी साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाली ठोस चर्चा आगे है।’ जापान के साथ ‘2+2’ वार्ता द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और गहरा करने और दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में अधिक गहराई लाने के लिए शुरू की गई थी।

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