खास खबरदेश-दुनियाफीचर्ड

86 वर्ष की आयु में उद्योगपति रतन टाटा का मुंबई में निधन, राजकीय सम्मान के साथ आज होगा अंतिम संस्कार

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, टाटा के रिश्तेदारों ने बताया है कि उनका पार्थिव शरीर गुरुवार को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक दक्षिण मुंबई स्थित राष्ट्रीय कला प्रदर्शन केंद्र (एनसीपीए) में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। टाटा को देश का गौरव बताते हुए शिंदे ने कहा कि वह अगली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 26/11 के आतंकवादी हमले के दौरान उन्होंने जो दृढ़ता दिखाई, उसे हमेशा याद रखा जाएगा…

 

मुंबई (ए)। रतन टाटा के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। उन्होंने 86 साल की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। टाटा के निधन पर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने समूह की तरफ से संदेश जारी किया। चंद्रशेखरन ने पद्मविभूषण रतन टाटा योगदान को अतुल्य बताया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि टाटा का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने 86 साल की आयु में बुधवार रात करीब 11.30 बजे अंतिम सांस ली। देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान- पद्म विभूषण से नवाजे जा चुके टाटा के निधन की पुष्टि करते हुए इस औद्योगिक घराने के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा, ‘हम रतन नवल टाटा को बहुत ही गहरे दुख के साथ विदाई दे रहे हैं। वे वास्तव में असाधारण शख्सियत थे।’ टाटा के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराने की बात कही। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, टाटा नैतिकता और उद्यमशीलता का अनूठा मिश्रण थे। सीएम ने रतन टाटा को किंवदंती बताया जिन्होंने 150 साल पुराने टाटा समूह को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया।

दो दशक से अधिक समय तक समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष रहे रतन टाटा ने शीर्ष पद संभालने से कई वर्ष पहले ही परोपकारी गतिविधियां शुरू कर चुके थे। 1970 के दशक में, उन्होंने आगा खान अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परियोजना की शुरुआत की थी। टाटा ने जनवरी 2017 में सेवानिवृत्त होने के बाद नटराजन चंद्रशेखरन को टाटा समूह का अध्यक्ष नियुक्त किया।

दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में से एक रतन टाटा कभी भी अरबपतियों की टाइम, फोर्ब्स, हुरुन जैसी किसी चर्चित सूची में शामिल नहीं रहे। यह इस बात की मिसाल है कि छह महाद्वीपों के 100 से अधिक देशों में काम करने वाली कंपनी के मुखिया होने के बावजूद टाटा सादगीपूर्ण जीवन जीना पसंद करते थे। शायद व्यक्तित्व के इसी पहलू के कारण कॉर्पोरेट दिग्गज रतन टाटा को ‘धर्मनिरपेक्ष जीवित संत’ माना गया। उनकी शालीनता और ईमानदारी के किस्से भी खूब सुर्खियों में रहे हैं। 1991 में अपने चाचा जेआरडी टाटा से टाटा समूह के अध्यक्ष का पदभार संभालने वाले रतन ने आधी सदी से भी अधिक समय तक यह पद संभाला।

रतन टाटा के निधन के बाद देश के औद्योगिक घरानों, खेल-मनोरंजन और सामाजिक-आर्थिक जगत की हस्तियों ने भी संवेदनाएं प्रकट कीं। टाटा को पशुओं के प्रति करुणा के लिए भी जाना जाता है। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) इंडिया ने भी रतन टाटा के निधन पर संवेदनाएं प्रकट कीं।

पेटा इंडिया की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक टाटा का पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा उनकी व्यावसायिक क्षमता की तरह ही प्रसिद्ध रही। इसे हमेशा याद किया जाएगा। पेटा ने कहा कि मुंबई में टाटा ट्रस्ट्स स्मॉल एनिमल हॉस्पिटल, उनकी करुणा का परिणाम है, जो पहले से ही जरूरतमंद असंख्य जानवरों की मदद कर रहा है। यह निश्चित रूप से पेटा इंडिया के आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्य का सहयोगी बनेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button