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डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन: पीएम मोदी ने पुलिसिंग व सुरक्षा पर किया मंथन, आज भी कार्यक्रम में करेंगे शिरकत

शुक्रवार से शुरू हुए सम्मेलन में पीएम मोदी का यह पहला दिन था। वह रविवार को भी सम्मेलन में शामिल होंगे। डीजीपी-आईजीपी के 59वें सम्मेलन में देश भर से 250 से अधिकारी शामिल हो रहे हैं। वहीं, 200 से अधिकारी वर्चुअल तरीके से भी जुड़े हैं…

 

भुवनेश्वर (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओडिशा की राजधानी में आयोजित पुलिस महानिदेशकों, पुलिस महानिरीक्षकों (डीजीपी-आईजीपी) के 59वें अखिल भारतीय सम्मेलन में शनिवार को शामिल हुए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिसिंग व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बता दें कि ये तीन दिवसीय सम्मेलन रविवार तक चलेगा, जहां आज भी पीएम मोदी शामिल होने वाले हैं।

इस सम्मेलन को लेकर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भुवनेश्वर में डीजीपी/आईजीपी सम्मेलन का पहला दिन उपयोगी रहा। पुलिसिंग और सुरक्षा पर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। रविवार को भी सम्मेलन में शामिल होंगे।

बैठक में भारत के विकास को बाधित करने के लिए तकनीक का उपयोग करने वाली विरोधी ताकतों, सीमा पार आतंकवाद, तस्करी, आंतरिक कट्टरपंथ और वामपंथी उग्रवाद जैसे कई मुद्दों पर गहन चर्चा की गई. साथ ही अधिकारियों ने पिछली बैठकों में किए गए फैसलों की प्रगति की जानकारी प्रधानमंत्री को दी. पीएम मोदी ने इन विषयों पर अपने सुझाव दिए जिन्हें सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय एजेंसियों को क्रियान्वयन के लिए अगले एक साल में लागू करने को कहा जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के अनुरूप पुलिस विभागों को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाना आवश्यक है. उन्होंने जोर देकर कहा, “पुलिस विभागों को साइलो में काम करने के बजाय आपस में जानकारी और डेटाबेस शेयर करना चाहिए ताकि अपराध और अपराधियों पर काबू पाया जा सके।”

इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वी सीमाओं पर अवैध प्रवासन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया जिसमें म्यांमार और बांग्लादेश के साथ की सीमाएं शामिल हैं।

सम्मेलन में “शहरी पुलिसिंग” की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर धमकी के कारण स्कूल-कॉलेज और हवाई सेवाओं के बाधित होने अपराधियों की ओर से कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर “डिजिटल गिरफ्तारी” करने जैसी घटनाओं का विश्लेषण किया गया।

इसके साथ ही आतंकवाद और उसके समर्थन तंत्र पर भी विचार-विमर्श हुआ. नई आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम  के कार्यान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री ने बीते 11 सालों में हर सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को आकार देने में एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित किया है. 2014 से ये सम्मेलन उग्रवाद, युवाओं के कट्टरपंथीकरण, साइबर अपराध और सुरक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण जैसे मुद्दों पर विचार-मंथन के लिए एक मंच बन चुका है।

जानकारी के अनुसार इस साल का सम्मेलन 200 से ज्यादा सीनियर पुलिस और केंद्रीय बलों के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ. बता दें कि भुवनेश्वर में हुए इस सम्मेलन में कई अधिकारी ऑनलाइन भी जुड़े. ये आयोजन भारतीय खुफिया ब्यूरो (IB) की ओर से आयोजित किया गया था और प्रधानमंत्री ने इसे “उत्पादक” करार दिया. पीएम ने अपने सोशल मीडिया पर इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

शुक्रवार से शुरू हुए सम्मेलन में पीएम मोदी का यह पहला दिन था। वह रविवार को भी सम्मेलन में शामिल होंगे। डीजीपी-आईजीपी के 59वें सम्मेलन में देश भर से 250 से अधिकारी शामिल हो रहे हैं। वहीं, 200 से अधिकारी वर्चुअल तरीके से भी जुड़े हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा था कि इस वर्ष सम्मेलन में कुछ अनूठी विशेषताएं भी जोड़ी गई हैं। योग सत्र, बिजनेस सत्र, ब्रेक-आउट सत्र से लेकर पूरे दिन का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है।

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