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भारत-जापान ने अगले दशक के लिए साझा विजन जारी किया, आठ क्षेत्रों में साझेदारी को मिलेगी नई दिशा

जापान ने भारत में अब तक तय किए गए 2022-2026 के 5 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य से आगे बढ़कर 10 ट्रिलियन येन का नया निजी निवेश लक्ष्य तय किया है। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए भारत-जापान व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CEPA) की समीक्षा को तेज करेंगे और “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूत करने के लिए औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देंगे…

 

नईदिल्ली (ए)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री इशिबा शिगेरू ने आज शुक्रवार को टोक्यो में हुई 15वीं वार्षिक शिखर वार्ता के दौरान भारत-जापान साझा विजन को अपनाया। इसके मुताबिक दोनों देशों ने अगले दस वर्षों के लिए आठ प्रमुख क्षेत्रों में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया। विजन का उद्देश्य एक मुक्त, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और दबाव-मुक्त इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बढ़ावा देना और आने वाली पीढ़ियों के लिए ठोस सहयोग स्थापित करना है।

इस संयुक्त घोषणा में पहला क्षेत्र नेक्स्ट जेनरेशन आर्थिक साझेदारी है, जिसके तहत जापान ने भारत में अब तक तय किए गए 2022-2026 के 5 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य से आगे बढ़कर 10 ट्रिलियन येन का नया निजी निवेश लक्ष्य तय किया है। दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए भारत-जापान व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CEPA) की समीक्षा को तेज करेंगे और “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूत करने के लिए औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देंगे। साथ ही भुगतान प्रणाली, लघु एवं मध्यम उद्योगों (SMEs), खाद्य सुरक्षा, एग्री-बिजनेस, आईसीटी और अफ्रीका में संयुक्त विकास परियोजनाओं पर भी जोर दिया गया है।

दूसरा क्षेत्र आर्थिक सुरक्षा साझेदारी है। इसके तहत दोनों देश आपूर्ति श्रृंखला, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, दवाओं, बायोटेक्नोलॉजी, दूरसंचार, क्लीन एनर्जी और नई तकनीकों में सहयोग करेंगे। “जापान-इंडिया एआई कोऑपरेशन इनिशिएटिव (JAI)” और बैटरी सप्लाई चेन सहयोग भी इस दिशा में शामिल हैं।

तीसरे क्षेत्र नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी के तहत भारत-जापान हाई-स्पीड रेल, मेट्रो, स्मार्ट सिटी, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट, कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स और 3डी शहरी योजना जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करेंगे। साथ ही “मेक इन इंडिया” के तहत भारत में ही रेल, मेट्रो और परिवहन से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों का निर्माण कर वैश्विक निर्यात की दिशा में काम होगा।

चौथा क्षेत्र पर्यावरण और इकोलॉजिकल लेगेसी है। इसमें दोनों देश जलवायु परिवर्तन, नेट-जीरो लक्ष्यों, नवीकरणीय ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, सतत कृषि, हाइड्रोजन ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी और पर्यावरण संरक्षण पर मिलकर काम करेंगे। “इंडिया-जापान क्लीन एनर्जी पार्टनरशिप” और “ज्वाइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज़्म” इसके अहम हिस्से हैं।

पांचवा क्षेत्र तकनीक और नवाचार साझेदारी है। इसके तहत दोनों देश क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी (LUPEX मिशन), न्यूक्लियर रिसर्च, एग्रीकल्चर इनोवेशन और स्टार्टअप सहयोग को बढ़ावा देंगे। “जापान-इंडिया स्टार्टअप सपोर्ट इनिशिएटिव (JISSI)” और “इंडिया-जापान फंड ऑफ फंड्स” के जरिए स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

वहीं छठा क्षेत्र स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग है। भारत के “आयुष्मान भारत” और जापान के “एशिया हेल्थ एंड वेलबीइंग इनिशिएटिव” के तहत दोनों देश यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, जेरियाट्रिक मेडिसिन, स्टेम सेल, डिजिटल हेल्थ, कैंसर उपचार, योग-आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के प्रचार पर काम करेंगे। जापान में योग और आयुर्वेद केंद्र खोलने पर भी सहमति बनी।

सातवां क्षेत्र जन-से-जन साझेदारी है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच 5 लाख से अधिक लोगों का आदान-प्रदान होगा, जिसमें 50,000 कुशल भारतीय पेशेवर जापान जाएंगे। “इंडिया-जापान टैलेंट ब्रिज (IJTB)”, “इंडिया-निप्पॉन प्रोग्राम फॉर एप्लाइड कंपिटेंसी ट्रेनिंग (INPACT)” और “NIHONGO पार्टनर्स” जैसी पहलें युवाओं और पेशेवरों को जोड़ेंगी। शिक्षा और शोध सहयोग भी बढ़ेगा।

आठवां क्षेत्र राज्य और प्रीफेक्चर साझेदारी है, यानी दोनों देशों के राज्यों के बीच सहयोग। इसके तहत भारत के राज्यों और जापान के प्रीफेक्चर के बीच सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट संबंधों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बढ़ाई जाएंगी और “इंडिया-कानसाई बिजनेस फोरम” तथा “इंडिया-क्यूशू सहयोग” जैसी पहलें स्थानीय उद्योगों और व्यापार को बढ़ावा देंगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी की 29-30 अगस्त 2025 को जापान यात्रा के दौरान यह संयुक्त दस्तावेज अपनाया गया। दोनों देशों ने विश्वास जताया कि यह साझा विजन आने वाले दशक में भारत-जापान साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा और अगली पीढ़ियों के लिए ठोस लाभ सुनिश्चित करेगा।

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