दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

दुर्ग जिला को जल संरक्षण में मिला 16वां स्थान: 25 लाख रुपए का ईनाम जीता, 68 स्थानों पर 16120 सोख्ता गड्डा तैयार किया

दुर्ग। जल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर इतिहास रचा है। जल संचय जनभागीदारी 1.0 (JSJB) के परिणामों में प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और जनभागीदारी के संगम का जीवंत उदाहरण है। प्रदेश में अब तक 4,05,563 कार्य पूर्ण कर जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन में बदल दिया गया है। दुर्ग जिला को उनकी उत्कृष्ट भागीदारी के लिए ₹25 लाख के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। यह दर्शाता है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता के साथ अपनाया गया है।

दुर्ग की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि जब जिला प्रशासन और जनता मिलकर कार्य करें तो असंभव भी संभव हो जाता है। JSJB 1.0 की सफलता ने न केवल सम्मान दिलाया है, बल्कि इसे जल प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल भी बना दिया है।

जलसंकट से निपटने के लिए दुर्ग जिले ने साबित कर दिया कि मोर गांव, मोर पानी और एकेच गोठ एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी, केवल नारा नहीं, बल्कि काम का तरीका है। जेएसजेबी-जल संचय जनभागीदारी अभियान में देशभर में दुर्ग को छत्तीसगढ़ जोन-2 की केटेगरी-3 में 16वां स्थान मिला है। इस उपलब्धि के लिए जिले को 25 लाख रुपए का पुरस्कार मिलेगा।

दुर्ग जिला ने कलेक्टर अभिजीत सिंह और जिला पंचायत सीईओ बजरंग दुबे के नेतृत्व में वर्षा जल संचय और जल संरक्षण के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। महात्मा गांधी नरेगा के तहत जल जीवन मिशन के अंतर्गत रनिंग वाटर क्षेत्र में सोक पिट का निर्माण किया गया। जनपद पंचायत दुर्ग में 100, धमधा में 126 और पाटन में 74 सोक पिट बनाए गए। इसके साथ ही रिचार्ज पिट निर्माण में दुर्ग में 59, धमधा में 118 और पाटन में 88 पिट बनाए गए।

जिला पंचायत के सीईओ बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि जल संरचनाओं के निर्माण से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि ग्रामीणों को बड़ी मात्रा में रोजगार भी मिला। इसके अलावा, जिले में लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए मोर गांव मोर पानी, एकेच गोठ एकेच बानी जैसे अभियान चलाए गए। जिले में अब तक 123 अमृत सरोवर बन चुके हैं और दूसरे चरण में 55 और सरोवर बन रहे हैं। पीएम आवासों और अन्य स्थानों पर कुल 1716 सोक पिट का निर्माण किया गया है।

300 ग्राम पंचायतों में 68 स्थानों पर 16,120 सोख्ता गड्डा तैयार किया गया। 423 हैंडपंप जिनका जल स्तर गिर गया था, उन्हें रिचार्ज किया गया। इन प्रयासों से दुर्ग जिले में जल संरक्षण और जल संचय का एक मजबूत ढांचा तैयार हुआ है। यह न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक और सक्रिय भी बनाएगा।

इस अभियान में दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर की भी अहम भूमिका रही। जिला प्रशासन की रिपोर्ट बताती है कि जहां पहले औसतन 20 से 22 मीटर तक खुदाई करनी पड़ती थी, वहीं अब 14 से 15 मीटर में पानी मिलने लगा है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह सुधार स्थायी लग रहा है, क्योंकि बरसात का पानी सीधे धरती में पहुंचकर भू-जल को संजो रहा है।

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