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चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन, ऐसे करें मां कालरात्रि की पूजा भय से मुक्ति, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

चैत्र नवरात्रि के 9 दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित होते हैं. आज सातवां दिन है. सातवां दिन मां कालरात्रि की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. मां कालरात्रि को शक्ति का सबसे उग्र और प्रभावशाली रूप कहा जाता है, जो बुराई और अंधकार का नाश करती हैं और अपने भक्तों को हमेशा सुरक्षा और आशीर्वाद देती हैं. मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा करते हैं, उनके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और साहस-आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. ऐसे में नवरात्रि के सातवें दिन भक्त सच्चे मन से मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करते हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। चैत्र नवरात्रि के आज सातवें दिन देवी मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा की जाती है। यह दिन विशेष रूप से भक्तों के लिए साहस, सुरक्षा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें कालरात्रि का रूप अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमय माना जाता है। उनका रंग गहन अंधकार के समान काला है, जो बुराइयों के नाश का प्रतीक है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि की साधना और व्रत करने से साधक को सभी भय से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ये देवी दुर्गा की 7वीं शक्ति हैं।

जिन लोगों को अनजाना भय सताता है, मानसिक तनाव बना रहता है, उन लोगों को कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। धर्मशास्त्रों में इन्हें दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और भय को दूर करने वाली देवी बताया गया है।

मां कालरात्रि के तीन नेत्र अत्यंत तेजस्वी और गोलाकार बताए गए हैं, जो पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी सवारी गर्दभ (गधा) मानी जाती है। उनके चार हाथों में अलग-अलग मुद्राएं और अस्त्र दिखाई देते हैं, दाहिना ऊपरी हाथ वरदान देने की मुद्रा में रहता है, जबकि निचला हाथ भय से मुक्ति का संकेत देता है। बाईं ओर एक हाथ में कांटा और दूसरे में खड्ग सुशोभित होता है।

इस दिन भक्त पूरी श्रद्धा से मां की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करते हैं। साथ ही इस पावन अवसर पर अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश भेजकर मां की कृपा और मंगलमय जीवन की कामना भी की जाती है।

कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा विधि

  • सप्तमी की पूजा अक्सर रात के समय में करना अधिक फलदायी माना जाता है, लेकिन आप माता का
  • पूजन सुबह के समय भी कर सकती हैं।
  • इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना है।
  • इसके बाद गहरे रंग के कपड़ों को पहनना है।
  • फिर आपको मां कालरात्रि के सामने नीले रंग का वस्त्र रखना है।
  • मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और मां का ध्यान करें और हाथ में जल लेकर पूजा को धारण करें।
  • मां को लाल और नीले रंग के फूल अर्पित करना बहुत शुभ होता है। उन्हें कुमकुम और अक्षत लगाएं।
  • इसके बाद मां कालरात्रि की कथा को पढ़ें।
  • कथा को पढ़ने के बाद माता की आरती करें।
  • फिर मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि मां को गुड़ बेहद प्रिय है।
  • इसके बाद इस प्रसाद को अन्य लोगों को भी बांटे।
  • अंत में कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं। इससे नकारात्मकता दूर होगी।

मां कालरात्रि की पूजा का आध्यात्मिक लाभ

  • ज्योतिषयों के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में शनि का अशुभ प्रभाव है, उनके लिए मां कालरात्रि की पूजा रामबाण है।
  • कोर्ट-कचहरी या गुप्त शत्रुओं से परेशान लोगों को देवी का आशीर्वाद निर्भय बनाता है।
  • देवी का ‘शुभंकरी’ स्वरूप हमारे भीतर के क्रोध, ईर्ष्या और मोह जैसे ‘रक्तबीजों’ का अंत करता है।
  • इस तरह से आप भी मां कालरात्रि का पूजन और मंत्रों का उच्चारण कर सकती हैं।
  • इससे आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार होगा।

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