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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आज: सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के इस्तीफा देने की अटकलें

कांग्रेस ने स्पष्ट तौर पर इन खबरों का खंडन किया है, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, अज्ञात सूत्रों के हवाले से कथित तौर पर इस्तीफे की पेशकश की खबर पूरी तरह अनुचित और गलत है…

नईदिल्ली (ए)। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में गांधी परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। खबर है कि रविवार यानी आज 13 मार्च की शाम को 4 बजे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) कार्यालय में बुलायी गयी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे।विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन से नाराज सीनियर नेताओं ने पार्टी के लीडरशिप पर सवाल खड़े किये हैं. ‘जी-23’ के नेता पहले से ही केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधते रहे हैं. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद शशि थरूर ने भी राष्ट्रीय नेतृत्व में बदलाव पर जोर दिया था. ऐसे में कार्यसमिति की बैठक में देखने वाली बात यह होगी कि गांधी परिवार के वफादार क्या रुख अपनाते हैं।

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि राहुल गांधी पहले भी सभी पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या सोनिया गांधी में से कोई भी कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनेगा. पार्टी के लोग गांधी परिवार से अलग अपना अध्यक्ष चुन ले. हालांकि, अंतत: सभी नेताओं ने सोनिया गांधी को ही प्रभार लेने के लिए मना लिया था. सोनिया गांधी लंबे अरसे से पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद राहुल गांधी ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद से ही सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष के रूप में पार्टी का कामकाज देख रही हैं. देश की सबसे पुरानी पार्टी करीब तीन साल बाद भी अपना स्थायी अध्यक्ष नहीं खोज पायी।

कांग्रेस ने स्पष्ट तौर पर इन खबरों का खंडन किया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, अज्ञात सूत्रों के हवाले से कथित तौर पर इस्तीफे की पेशकश की खबर पूरी तरह अनुचित और गलत है। कांग्रेस का यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन रहा है। उसने पंजाब में भी सत्ता गंवा दी है।

अब उसके पास अपने बलबूते सिर्फ राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही सरकार बची है. पांच राज्यों में हार के बाद कांग्रेस के असंतुष्ट धड़े जी-23 के कुछ नेताओं की रविवार को वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के घर बैठक भी हुई थी। जी-23 ने ही दो साल पहले कांग्रेस संगठन में व्यापक फेरबदल की मांग की थी।वहीं केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी कहा है कि पार्टी में बदलाव को अब टाला नहीं जा सकता. उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी की किस्मत बदलनी है तो उसे व्यापक स्तर पर फेरबदल करना ही होगा।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान की अगुवाई पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने संभाली थी. कांग्रेस को 403 में से सिर्फ दो सीटों पर विजय हासिल हुई है. पार्टी का वोट प्रतिशत भी घटकर महज 2.3 फीसदी रह गया है. पार्टी की बुरी तरह पराजय के बाद गांधी परिवार के सदस्यों की आलोचना फिर उभरने लगी है. पार्टी में आमूलचूल बदलाव और नेतृत्व परिवर्तन की मांग फिर तेज होने लगी है।

हालांकि गांधी परिवार के वफादारों ने उनका पक्ष लिया है। एक इंटरव्यू में पार्टी के संकटमोचकों में से एक डीके शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस गांधी परिवार के बिना एकजुट नहीं रह सकती. उनके बिना अस्तित्व में रहना असंभव है. वहीं लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि सांगठनिक कमजोरी विधानसभा चुनाव में पराजय का मुख्य कारण है. वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा है कि पार्टी का पुनर्गठन आवश्यक है।

चौधरी ने कहा, सांगठनिक कमजोरी के अलावा पंजाब में सत्ता विरोधी लहर से पार न पाना और गोवा में प्रतिद्वंद्वी तृणमूल कांग्रेस द्वारा पहुंचाया गया नुकसान जैसी कई वजहें रही हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि उन्होंने पार्टी नेतृत्व में किसी भी बदलाव की जरूरत से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने पूरी ताकत से प्रयास किया।

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