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आज से होगी पीएम मोदी को मिले उपहारों की नीलामी, 1.5 करोड़ की कुल 600 वस्तुएं है शामिल

सबसे अधिक कीमत वाले स्मृतिचिह्नों में पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता अजीत सिंह, सिमरन शर्मा, रजत पदक विजेता निशाद कुमार के खेल के जूते और रजत पदक विजेता शरद कुमार की हस्ताक्षरित टोपी शामिल हैं। सभी की कुल कीमत लगभग 2.86 लाख रुपये है…

 

नईदिल्ली (ए)। संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पीएम मोदी को पिछले एक साल में मिले उपहारों एवं स्मृति चिह्नों की नीलामी मंगलवार से शुरू होगी। इस बार नीलामी में 600 वस्तुएं नीलामी में शामिल होंगी। इनमें पैरालंपिक पदक विजेताओं से मिले स्पोर्ट्स जूतों, राम मंदिर की प्रतिकृति, चांदी की वीणा शामिल है। इस सभी वस्तुओं का आधार मूल्य कुल 1.5 करोड़ रुपये है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमवार को नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में प्रधानमंत्री के स्मृति चिह्नों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि इन उपहारों की नीलामी के लिए आधार मूल्य का निर्धारण एक सरकारी समिति करती है। इनकी कीमतें 600 रुपये से लेकर 8.26 लाख रुपये तक हैं। नीलामी 2 अक्टूबर को समाप्त होगी।

सबसे अधिक कीमत वाले स्मृतिचिह्नों में पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता अजीत सिंह, सिमरन शर्मा, रजत पदक विजेता निशाद कुमार के खेल के जूते और रजत पदक विजेता शरद कुमार की हस्ताक्षरित टोपी शामिल हैं। सभी की कुल कीमत लगभग 2.86 लाख रुपये है। पैरालंपिक के कांस्य पदक विजेता नित्या श्री सिवन और शटलर सुकांत कदम के बैडमिंटन रैकेट और रजत पदक विजेता योगेश खातुनिया के डिस्कस की कीमत 5.50 लाख रुपये रखी गई है।

राम मंदिर के मॉडल की कीमत 5.50 लाख रुपये है, एक मोर की मूर्ति की कीमत 3.30 लाख रुपये है, राम दरबार की एक मूर्ति की कीमत 2.76 लाख रुपये है और चांदी की वीणा जिसकी कीमत 1.65 लाख रुपये है। सबसे कम कीमत वाले स्मृति चिन्हों में सूती अंगवस्त्र, टोपी और शॉल शामिल हैं, जिनकी कीमत 600 रुपये है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, प्रधानमंत्री ने अपने उपहारों एवं स्मृति चिह्नों को नीलाम करने की नई संस्कृति शुरू की है। उन्होंने यह परंपरा तब शुरू की थी, जब वे मुख्यमंत्री थे। उन्हें जो उपहार मिलते हैं उन्हें नीलामी के माध्यम से लोगों को वापस कर दिया जाता है और उससे अर्जित धन का इस्तेमाल गंगा नदी की सफाई जैसे नेक कार्य के लिए किया जाता है। ऐसी नीलामी छठी बार आयोजित की जा रही है, और इसके माध्यम से जुटाई गई धनराशि राष्ट्रीय गंगा कोष में दान की जाएगी।

 

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