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कलेक्टर डॉ.गौरव सिंह ने पशुपालन विभाग के कृत्रिम गर्भाधान केंद्र और मत्स्य पालन का अवलोकन किया

रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने पशुधन विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए निरीक्षण किया। इस दौरान वे स्वयं कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र सेजबहार पहुंचे और वहां मौजूद विशेषज्ञों एवं पशुपालकों से विस्तारपूर्वक जानकारी ली।

पशु चिकित्सा सेवायें के संयुक्त संचालक डॉ शंकर लाल उइके ने बताया कि इस सेजबहार उपकेंद्र में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक गाय औऱ भैंस में 1047 कृत्रिम गर्भाधान (AI) के किया जा चुका हैं। इसके परिणामस्वरूप लगभग 450 उच्च नस्ल गिर, साहीवाल, एच एफ, जर्सी औऱ मुर्रा के बछिया एवं बछड़ों का जन्म हुआ है, जिस पर कलेक्टर डॉ सिंह ने सराहना की।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. सिंह ने कृत्रिम गर्भाधान करने के उपकरण क्रायो कंटेनर एवं टीका रखने के फ्रीज का अवलोकन किया। श्री उइके ने बताया गया कि पशुओं को खुरहा-चपका (FMD) बीमारी से बचाने के लिए लगातार हर छः महीने में नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को अभियान की निरंतर मॉनिटरिंग करते हुए अधिक से अधिक पशुपालकों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कलेक्टर ने इस संस्था के प्रभारी AVFO श्री कैलाश कैमरो से भी चर्चा की और दवाइयों का पारदर्शी उपयोग एवं सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इस दौरान कलेक्टर ने उपस्थित पशुपालकों को उनके पशुओं के लिए स्वास्थवर्धक दवाई का वितरण किया।

कलेक्टर ने किया सेजबहार में मत्स्य पालन का अवलोकन

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह धरसींवा विकासखण्ड के दौरे पर निकले। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के हितग्राहियों द्वारा किए जा रहे मत्स्य पालन का निरीक्षण किया। वहां के हितग्राहियों ने बताया कि वहां के 05 नर्सरी एवं 04 तालाबों में मत्स्य पालन किया जा रहा है।

नर्सरी में जो फिश सीड विकसित होते हैं उसे दुबारा तालाब में डाल दिया जाता है। इस प्रकार प्रति महीने करीब 17 टन का उत्पादन होता है। कलेक्टर ने हितग्राहियों से चर्चा करते हुए कहा कि इस योजना को अच्छी तरह से क्रियान्वयन करें, जल संरक्षण पर अधिक ध्यान देवें जिसके लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें।

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