दुर्ग-भिलाईफीचर्ड

दुर्ग जिले में नहीं बना मुस्लिम समाज से कांग्रेस अध्यक्ष, भिलाई शहर में मुस्लिम समाज की एंट्री

भिलाई। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में हाल ही में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस को जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां करनी है, इसके लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया है। कांग्रेस का बड़ा वोट बैंक माने जाने वाले मुस्लिम समाज में भी संगठन में हिस्सेदारी की मांग उठने लगी है। भिलाई में मुस्लिम समाज ने एकजुट होकर मांग की है कि भिलाई शहर अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी उनके वर्ग के किसी नेता को दी जाए।

दरअसल भिलाई शहर कांग्रेस में नए जिलाध्यक्ष की घोषणा होनी है, इस पद के लिए कांग्रेस के कई नेता दावेदारी कर रहे हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थित वर्तमान अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव समर्थित पार्षद एवं MIC लक्ष्मीपति राजू , पूर्व महापौर नीता लोधी, पार्षद संदीप निरंकारी, पार्षद लालचंद वर्मा आदि दावेदारी कर रहे है लेकिन सबसे मज़ेदार बात ये निकल के आ रही है कि मुस्लिम समाज की बड़ी बैठक में पूर्व मंत्री कद्दावर नेता मोहम्मद अकबर समर्थक माने जाने वाले जिला शहर महामंत्री फहीम खान का नाम जुड़ गया है।

मुस्लिम समाज ने उनके नाम को लेकर सहमति दी है और कहा कि दुर्ग जिले में वैशाली नगर, भिलाई नगर, दुर्ग ग्रामीण विधानसभा में अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है और लंबे अर्से से इस वर्ग के नेता कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, लेकिन दशकों से संगठन में उनकी भागीदारी नहीं रही है, इसी बात को लेकर अब मुस्लिम समाज व कांग्रेस नेता एकजुट हुए हैं।

हाल में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में भिलाई नगर विधानसभा से एक मुस्लिम उम्मीदवार को 465 वोट मिले। मुस्लिम समाज ने समाज के व्यक्ति को छोड़कर कांग्रेस को भर भर के वोट किया। मुस्लिम समाज का रुख हमेशा से कांग्रेस के प्रति झुकाव दिखता है, उसके बावजूद कांग्रेस मुस्लिम समाज को दरकिनार करते आ रही है।

शहर के अलग-अलग मुस्लिम संगठनों से जुड़े बुद्धिजीवियों ने आपसी सहमति से मौजूदा भिलाई शहर जिला महामंत्री फहीम खान का नाम तय किया और इस संबंध में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने की बात कह रहे हैं। फहीम खान पूर्व मंत्री कद्दावर नेता मोहम्मद अकबर समर्थित नेता माने जाते है। भिलाई शहर के जाने माने व्यवसायी भी है। समाज ने पहली बार आम सहमति से नाम तय किया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button