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नक्सलियों को बड़ा झटका: माड़ डिवीजन के शिक्षा कमांडर और CNM प्रमुख ने किया आत्मसमर्पण

जीवन 2008 में संगठन से जुड़े थे और शुरुआत में पीएलजीए की सैन्य इकाई में काम करते थे। 2012-13 के बाद उन्होंने माओवादियों की विचारधारा सिखाने के लिए माड़ डिवीजन की मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल (MOPOS) में शिक्षक की भूमिका निभाई। वे मोबाइल अकादमिक स्कूल (MAS) के जरिए अबूझमाड़ के विभिन्न गांवों में जाकर उग्रवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे…

 

रायपुर। मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले में लंबे समय से सक्रिय नक्सली दंपत्ति ने मंगलवार को पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। ये दोनों वामपंथी उग्रवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) में पिछले 25 वर्षों से सक्रिय थे और संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे। आत्मसमर्पण करने वालों में 45 वर्षीय जीवन तुलावी उर्फ राम तुलावी शामिल हैं, जो परवीडीह गांव (थाना मोहला) के निवासी हैं।

वह वर्तमान में माओवादी संगठन के माड़ डिवीजन में डिवीजनल कमेटी मेंबर (DVCM) और शिक्षा इकाई के कमांडर के रूप में कार्यरत थे। उन पर राज्य सरकार द्वारा 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। जीवन 2008 में संगठन से जुड़े थे और शुरुआत में पीएलजीए की सैन्य इकाई में काम करते थे। 2012-13 के बाद उन्होंने माओवादियों की विचारधारा सिखाने के लिए माड़ डिवीजन की मोबाइल पॉलिटिकल स्कूल (MOPOS) में शिक्षक की भूमिका निभाई। वे मोबाइल अकादमिक स्कूल (MAS) के जरिए अबूझमाड़ के विभिन्न गांवों में जाकर उग्रवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे।

उनकी पत्नी अगाशा उर्फ आरती कोर्राम (उम्र 35), तेलीटोला गांव (थाना मोहला) की निवासी हैं और माओवादी संगठन की प्रेस टीम में काम कर रही थीं। वह चेतना नाट्य मंडली (CNM) की कमांडर भी थीं। अगाशा एक प्रशिक्षित गायिका, नर्तकी, कवियित्री, वक्ता और गीतकार रही हैं, जो माओवादी विचारधारा को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देती थीं। साथ ही वह संगठन के लिए प्रेस विज्ञप्तियां तैयार करने और कंप्यूटर संचालन का कार्य भी करती थीं। वे एरिया कमेटी सदस्य (ACM) के पद पर थीं।

इन दोनों ने राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) अभिषेक शांडिल्य, एसपी वाईपी सिंह, 27वीं बटालियन आईटीबीपी के कमांडेंट विवेक कुमार पांडे और 44वीं बटालियन आईटीबीपी के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पुलिस और आईटीबीपी के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में इस क्षेत्र में लगातार किए जा रहे सुरक्षा अभियानों से वामपंथी उग्रवादियों की गतिविधियों को बड़ा नुकसान हुआ है।

बीते तीन महीनों में मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी जिले के पांच वरिष्ठ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिससे माओवादी संगठन को गंभीर झटका लगा है। यह इलाका छत्तीसगढ़ के कांकेर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जैसे अत्यधिक प्रभावित नक्सल क्षेत्रों से सटा हुआ है।

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