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मंत्री और महिला एसपी में जोरदार बहस…मंत्री बोले- सिपाही को सस्पेंड करो, एसपी ने कर दिया मना

नियमों का यह तर्क मंत्री को रास नहीं आया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जब आपके पास पावर नहीं है तो जाइए यहां से। जवाब में महिला एसपी ने भी अपनी बात पर कायम रहते हुए पत्र लिखने की बात दोहराई। माहौल में तल्खी बढ़ती देख कैथल की डीसी अपराजिता ने तुरंत हस्तक्षेप किया और किसी तरह स्थिति को संभाला। अंततः एसपी ने मंत्री के आदेशानुसार डीजीपी को पत्र लिखने की सहमति दी, तब जाकर मामला शांत हुआ…

 

 

चंडीगढ़ (ए)। हरियाणा की राजनीति में गब्बर नाम से मशहूर कैबिनेट मंत्री अनिल विज फिर अपने तल्ख तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। कैथल में आज आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई, जब मंत्री विज और जिले की एसपी उपासना के बीच तीखी बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि मंत्री ने सरेआम महिला अफसर को मीटिंग से बाहर जाने तक कह दिया।

पूरा मामला पैसे के लेन-देन से जुड़ी शिकायत से शुरू हुआ। तितरम गांव के संदीप मलिक ने आरोप लगाया कि कुरुक्षेत्र में तैनात एएसआई संदीप ने जमीन के नाम पर उनसे पैसे लिए। अब पुलिसिया रौब दिखाकर पैसे नहीं लौटा रहा है। शिकायत सुनते मंत्री अनिल विज ने मौके पर मौजूद कैथल एसपी उपासना को सिपाही को तुरंत सस्पेंड करने का फरमान सुना दिया।

पेच तब फंसा, जब एसपी ने कानूनी मर्यादा का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी एएसआई कुरुक्षेत्र जिले में तैनात है, इसलिए कैथल एसपी के पास उसे निलंबित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कार्रवाई के लिए डीजीपी या कुरुक्षेत्र एसपी को पत्र लिख सकती हैं।

नियमों का यह तर्क अनिल विज को रास नहीं आया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि जब आपके पास पावर नहीं है तो जाइए यहां से। जवाब में एसपी उपासना ने भी अपनी बात पर कायम रहते हुए पत्र लिखने की बात दोहराई। माहौल में तल्खी बढ़ती देख कैथल की डीसी अपराजिता ने तुरंत हस्तक्षेप किया और किसी तरह स्थिति को संभाला। अंततः एसपी ने मंत्री के आदेशानुसार डीजीपी को पत्र लिखने की सहमति दी, तब जाकर मामला शांत हुआ।

यह पहली बार नहीं है, जब अनिल विज और किसी महिला आईपीएस अधिकारी के बीच ऐसी खींचतान देखी गई हो। इससे पहले फतेहाबाद में आईपीएस संगीता कालिया के साथ उनकी तीखी बहस पूरे देश में सुर्खियों में रही थी। उस समय भी विज ने अधिकारी को गेट आउट कह दिया था। उसके बाद संगीता कालिया का तबादला कर दिया गया था। कैथल की यह घटना फिर प्रशासनिक प्रोटोकॉल और राजनीतिक रसूख के बीच की बारीक रेखा पर बहस छेड़ गई है।

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