जब नरेंद्र मोदी देश की सत्ता में आए उस वक्त करीब 26 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं। उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य शामिल थे…
नईदिल्ली (ए)। पश्चिम बंगाल की 293 विधानसभा सीटों पर मतगणना जारी है। अधिकतर सीटों के नतीजे आ चुके हैं और बीजेपी लगभग 200 सीटें जीतती नजर आ रही है।। बीजेपी ने बहुमत का 148 वाला जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। वहीं, टीएमसी 100 सीटें भी नहीं जीत पाई है, जबकि ममता बनर्जी ने लगातार 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा किया था। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराए गए। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न हुआ। वहीं मतदान संपन्न होने के बाद मतों की गणना हुई। ममता बनर्जी के लिए सत्ता बचाना बड़ी चुनौती थी और वह इसे पार करने में विफल रही हैं। राजधानी कोलकाता की चर्चित सीट भवानीपुर से BJP के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हजार 105 के वोटों के अंतर से मात दे दी। यह रिजल्ट बंगाल की सियासत में एक बड़ा मैसेज माना जा रहा है। नंदीग्राम के बाद अब भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर सीट से भी जीत गए हैं।
पश्चिम बंगाल में 294 की जगह 293 सीटों पर ही मतगणना हो रही है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर गड़बड़ी की सूचना मिल रही थी। इस बीच शनिवार को स्थानीय लोग सड़कों पर उतर गए और टीएमसी के वर्कर्स की हकीकत कैमरे के सामने बयां की। आखिरकार चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले की फलता विधानसभा सीट पर वोटिंग के दौरान भारी गड़बड़ी को लेकर बड़ा निर्णय लिया और यहां 29 अप्रैल को हुई वोटिंग को रद्द करते हुए इस सीट पर री-पोलिंग का आदेश दे दिया। अब इस सीट पर 21 मई को मतदान होगा और 24 मई को इस सीट के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
चुनाव आयोग के अनुसार, भाजपा ने सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में 156 सीटें जीतकर और 52 अन्य सीटों पर बढ़त बनाकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जिससे उसकी कुल सीटों की संख्या 208 हो गई। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है, लेकिन फाटा में मतदान रद्द होने के कारण 293 सीटों पर मतगणना जारी रहने से बहुमत का आंकड़ा घटकर 147 रह गया है।
भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज अशोक डिंडा लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। डिंडा भाजपा के टिकट पर पश्चिम बंगाल की मोयना सीट से उम्मीदवार थे और उन्होंने बड़े अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराया।
केरल की राजनीति में एक नया इतिहास रचा गया है। विधानसभा चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि भाजपा अब राज्य में केवल एक ‘वोट-कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति बन चुकी है। पार्टी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। इतिहास रचते हुए राजीव चंद्रशेखर ने 4900 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। वहीं, कोल्लम जिले की चथन्नूर सीट से भाजपा उम्मीदवार बीबी गोपकुमार ने भी 4,398 वोटों से जीत दर्ज की है। इसके अलावा वी मुरलीधरन ने कझाकट्टम निर्वाचन क्षेत्र से 428 मतों के मामूली अंतर से जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही केरल में भाजपा को तीन सीटें मिली हैं, जो अब तक पहली बार हुआ है।
असम विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 126 सदस्यीय सदन में 102 सीटों पर जीत या बढ़त हासिल कर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है। नतीजों के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विक्ट्री साइन दिखाकर और झूमकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया और इसे जनता के विश्वास की जीत बताया।
असम में भाजपा के एक तरफा जीत पर असम के एआईसीसी प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर ने ट्वीट किया, ‘मैं तत्काल प्रभाव से असम के महासचिव पद से अपना इस्तीफा दे रहा हूं। हाल के चुनाव परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं और मैं इस परिणाम में अपनी भूमिका की पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। हमारे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, हम असम की जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके, जिनकी सेवा करने का हमने लक्ष्य रखा था।’
दक्षिण अभिनेता थलापति विजय ने सिनेमाई पर्दे पर अपने अभिनय का खूब लोहा मनवाया। उनके करोड़ों फैंस हैं। मगर, अब अभिनय से विराम लेकर वे राजनीति में उतर आए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्ट्री कजगम’ (टीवीके) बनाकर पॉलिटिक्स में डेब्यू किया। पहली बार उन्होंने अपनी पार्टी के जरिए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया और वे इतिहास रच रहे हैं। 4 मई को तमिलनाडु में हो रही मतगणना में उनकी पार्टी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने की दिशा में अग्रसर है। विजय ने पहले ही चुनाव में CM स्टालिन की DMK का खेल बिगाड़ दिया है।
तमिल सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके की पहली आधिकारिक रैली 27 अक्तूबर 2024 को तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले के विक्रवंडी में आयोजित हुई थी। यहां बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी। विजय ने लोगों को संबोधित करते हुए बांटने वाली राजनीति करने वाली पार्टियों को आड़े हाथों लिया। साथ ही उन्होंने द्रविड़ मॉडल के नाम पर धोखाधड़ी करने और एक परिवार पर राज्य को लूटने का आरोप भी लगाया।
तमिलनाडु के मौजूदा CM एमके स्टालिन कोलाथुर सीट हार गए हैं। उन्हें TVK के वीएस बाबू ने 8000 से ज्यादा वोटों से हराया है। बाबू पहले DMK में थे। फरवरी 2026 में ही उन्होंने विजय की पार्टी जॉइन की थी।
केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है, 140 सीटों पर नतीजे घोषित हो चुके हैं। कांग्रेस ने 63 सीटों पर, CPI(M) ने 26 और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 22 सीट पर जीत हासिल की है।
पुडुचेरी में बीजेपी+ सरकार की वापसी हुई है। 28 सीटों के नतीजे आ गए हैं। CM रंगास्वामी की पार्टी 10 सीटें जीत चुकी है। DMK ने 5 सीट, BJP ने 4 और TVK ने 2 सीट जीती हैं। विजय ने तिरुचिरापल्ली ईस्ट सीट से 27,416 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 91,381 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे DMK के एस. इनिगो इरुदयराज को 63,965 वोट मिले।
मई 2014 में नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके सत्ता में आने के समय देश के सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दल सरकार चला रहे थे। इनमें पांच राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री थे, जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब में उसकी सहयोगी पार्टी सत्ता में थी। इन दो राज्यों में देश की छह फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। बाकी पांच राज्यों छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा के मुख्यमंत्री थे। इन राज्यों में देश की 19 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है।
यानी, जब नरेंद्र मोदी देश की सत्ता में आए उस वक्त करीब 26 फीसदी आबादी पर भाजपा और उसकी सहयोगी सरकारें चल रही थीं। उस वक्त देश के 14 राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी पार्टियों की सरकार थी। कांग्रेस शासित इन राज्यों में देश की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे बड़े राज्य शामिल थे।
2014 में सात राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। चार साल बाद मार्च 2018 में 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार थी। इन राज्यों में देश की करीब 71 फीसदी आबादी रहती है। ये वो दौर था, जब भाजपा शासन आबादी के लिहाज से पीक पर था। वहीं, चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। इन राज्यों की सात फीसदी आबादी रहती है।
बिहार चुनाव से पहले दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए। फरवरी 2025 में हुए इस चुनाव के बाद 27 साल बाद भाजपा ने दिल्ली में वापसी की। देश की आबादी का लगभग 1.3 फीसदी हिस्सा यहां रहता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1.68 करोड़ थी। देश के 0.02 फीसदी भू-भाग वाले केंद्र शासित प्रदेश में फरवरी 2025 तक आम आदमी पार्टी की सरकार शासन कर रही थी।
बिहार में बीते साल नवंबर में एक बार फिर एनडीए की सरकार बनने के साथ ही देश के सियासी नक्शे में कोई बदलाव नहीं हो पाया। अगर सरकार बदलती तो भाजपा और उसके सहयोगी सरकारों की देश में कुल संख्या सिमटकर 19 राज्यों तक रह जाती, हालांकि एनडीए ने अपनी जमीन बचाए और बनाए रखी। फिलहाल एनडीए 20 राज्यों में काबिज है। अब 2026 के चुनाव उसकी बढ़ती या कम होती जमीन पर फैसला करेंगे। पांचों राज्यों के विधानसभा का फाइनल आंकड़ा अभी भी जारी किया गया है।

















