राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए सरकार ने पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को भी राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है। कानून लागू होने के बाद राष्ट्रीय गान की तरह राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने पर भी जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकेगी…
नईदिल्ली (ए)। लोकसभा में गुरुवार को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। यह विधेयक 29 जुलाई को राज्यसभा से पास हो गया था। अब राष्ट्रपति के मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके जरिए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन का प्रस्ताव है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस विधेयक में क्या प्रावधान हैं? इसकी जरूरत क्यों पड़ी? इससे क्या बदलाव होंगे? पहले का कानून क्या था? राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के लिए क्या दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं? राष्ट्रगीत का इतिहास क्या है?
विधेयक में क्या प्रस्ताव है?
विधेयक के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत का गायन रोकता है या राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत गा रही किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
विधेयक क्यों लाया गया?
- 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा की बैठक में उसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, उसे ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और समान दर्जा प्राप्त होगा।
- वर्तमान में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के अपमान या उसमें बाधा डालने को रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए अधिनियम की धारा 3 में संशोधन कर राष्ट्रीय गीत को भी इसके दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि ऐसे कृत्य दंडनीय बन सकें।
राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 क्या है?
इस धारा के तहत अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर या सार्वजनिक दृष्टि में:
- भारत के राष्ट्रीय ध्वज को जलाता है,
- फाड़ता है,
- विकृत या गंदा करता है,
- पैरों तले रौंदता है,
- उसका अनादर करता है,
- या भारत के संविधान का अपमान करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
कानून यह भी स्पष्ट करता है कि अगर कोई व्यक्ति संविधान या राष्ट्रीय ध्वज के बारे में कानूनी तरीके से आलोचना करता है या संशोधन की मांग करता है, तो उसे अपराध नहीं माना जाएगा।
2. धारा 3: राष्ट्रीय गान के गायन में बाधा
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर:
- भारतीय राष्ट्रीय गान (जन गण मन) का गायन रोकता है, या
- राष्ट्रीय गान गा रही सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है तो उसे अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
बाद में इस अधिनियम में धारा 3ए जोड़ी गई। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धारा 2 या धारा 3 के तहत पहले दोषी ठहराया जा चुका है और फिर वही अपराध दोबारा करता है, तो दूसरी और उसके बाद की हर सजा में कम-से-कम एक वर्ष का कारावास होगा।
इस कानून में क्या शामिल नहीं था?
1971 के इस अधिनियम में:
- राष्ट्रीय ध्वज शामिल था।
- भारत का संविधान शामिल था।
- राष्ट्रीय गान (जन गण मन) शामिल था।
लेकिन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का कोई उल्लेख नहीं था। यानी अगर कोई व्यक्ति वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालता था, तो इस अधिनियम की धारा 3 सीधे उस पर लागू नहीं होती थी। इसी कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक, 2026 लाया गया है, जिसमें धारा 3 में राष्ट्रीय गीत जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है।
वंदे मातरम् का इतिहास क्या है?
- वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी।
- यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में प्रकाशित हुआ।
- बाद में इसे बंकिम चंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया गया।
- रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस गीत को संगीतबद्ध किया।
- स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ देशभक्ति और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बन गया।
- 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में पहली बार विदेश में भारतीय तिरंगा फहराया, जिस पर ‘वंदे मातरम्’ अंकित था।
- 2025 में वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे हुए, जिसे भारत की राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया गया।

























