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छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम की उप सचिव सौम्या चौरसिया की अंतरिम जमानत बढ़ी, अब इस तिथि को अगली सुनवाई करेगा सुप्रीमकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया को दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया है। सौम्या को सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर को यह गौर करते हुए अंतरिम जमानत दी थी कि वह एक साल और नौ महीने से हिरासत में हैं और उनके खिलाफ आरोप अभी तक तय नहीं किए गए हैं…

 

नईदिल्ली (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सौम्या चौरसिया को दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया है। सौम्या कथित कोयला घोटाले से जुड़े मामले में आरोपी हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले पर अगली सुनवाई 27 नवंबर को तय की है। कोर्ट ने 25 अक्तूबर के आदेश में कहा कि तब तक अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर को यह गौर करते हुए अंतरिम जमानत दी थी कि वह एक साल और नौ महीने से हिरासत में हैं और उनके खिलाफ आरोप अभी तक तय नहीं किए गए हैं। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया था कि वह चौरसिया को सेवा में फिर से बहाल न करे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निचली अदालत के सामने हाजिर होने का आदेश दिया था। इसके साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि वह किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगी।

चौरसिया ने हाईकोर्ट के आदेश को दी है चुनौती
चौरसिया ने 28 अगस्त को हाईकोर्ट के जमानत खारिज करने के आदेश को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 को चौरसिया की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वह प्रथम दष्टया धनशोधन में शामिल हैं। कोर्ट ने कहा था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पर्याप्त सबूत एकत्र किए हैं, जो यह साबित करते हैं कि चौरसिया धनशोधन अधिनियम की धारा तीन के तहत अपराध में सक्रिय रूप से शामिल थीं।

प्रवर्तन निदेशालय ने क्या आरोप लगाए थे
केंद्रीय जांच एजेंसी ने 2022 में प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य में कोयला-लेवी घोटाला करने के लिए एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। ईडी के मुताबिक, दो वर्षों में करीब 540 करोड़ रुपये की उगाही की गई। धनशोधन का मामला आयकर विभाग की एक शिकायत से शुरू हुआ था।

ईडी ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में प्रत्येक टन कोयले के परिवहन के लिए पच्चीस हजार रुपये की उगाही की जा रही है, जिसमें वरिष्ठ नौकरशाह, कारोबारी, राजनेता और बिचौलिए शामिल हैं।

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