भिलाई (सारनाथ एक्सप्रेस)। किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता उसके नेतृत्व पर निर्भर करती है। कॉलेज की महिला प्राचार्या न केवल एक प्रशासक होती हैं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी होती हैं। वे कॉलेज के अनुशासन, शिक्षा की गुणवत्ता और समग्र विकास की जिम्मेदारी संभालती हैं।
महिला प्राचार्या अपनी मेहनत, बुद्धिमत्ता और नेतृत्व क्षमता से कॉलेज को सही दिशा देती हैं। वे शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच समन्वय स्थापित करती हैं तथा कॉलेज में शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सारनाथ एक्सप्रेस ने डॉ. खूबचंद बघेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई 03 की प्राचार्या डॉ. अश्विनी महाजन से विशेष बातचीत की।
प्राचार्या डॉ.अश्विनी महाजन की प्रारंभिक और हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा शासकीय स्कूल, बिलासपुर में हुईं। डीपी विप्र कॉलेज बिलासपुर से उन्होंने आर्ट्स में स्नातक और सोशोलॉजी में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल किया। जब वे एमए फाइनल में थी उसी दौरान उनके पिताजी का देहांत हो गया, जिसके कारण उनके परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। जिसके कारण उन्हें नौकरी करने की आवश्यकता होने लगी और वे उसकी तैयारी में जुट गई।
वर्ष 1987 में उनकी नौकरी सहायक प्राध्यापक के पद पर हुई और उन्हें शासकीय कॉलेज कटघोरा में पदस्थापना मिली। यहां एक वर्ष सेवा देने के बाद इनका तबादला शासकीय कॉलेज, रामानुजगंज हो गया, जहां उन्होंने एक वर्ष तक अपनी सेवाएं दी। उसके बाद उनका तबादला एसबीआर कॉलेज बिलासपुर में हुआ, जहां उन्होंने करीब दस वर्षों तक अपनी सेवाएं दी। वर्ष 1997 से वर्ष 2006 तक उन्होंने शासकीय कॉलेज, कोरबा में अपनी सेवाएं दी। वर्ष 2007 में उनका तबादला साइंस कॉलेज, दुर्ग में हुआ, जहां उन्होंने 2024 तक अपनी सेवाएं दी। इस दौरान वर्ष 2009 में उनका प्रमोशन प्राध्यापक के पद पर हुआ। जनवरी 2025 से भिलाई 03 स्थित डॉ खूबचंद बघेल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्या के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है। उन्होंने वर्ष 2006 में सोशोलॉजी में पीएचडी किया।
डॉ. महाजन सात भाई-बहन है और सभी शासकीय कर्मचारी है। इनके पिताजी रेलवे गार्ड थे तथा माता गृहिणी है। उनकी पुत्री मेकअप आर्टिस्ट है और मनोविज्ञान में पीएचडी की है।
यात्रा करने, गाना गाने में विशेष रुचि रखने वाली डॉ महाजन अपनी माताजी को अपना आदर्श मानती है। उन्होंने संघर्ष को बहुत नजदीक से देखा और जिया है।
महिला दिवस पर महिलाओं के संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं को बिना डर के ईमानदारी से अपना काम करना चाहिए, सच्चाई का हमेशा साथ देना चाहिए, सच्चाई ऐसा शस्त्र है जो भले देर से काम करता है पर हमेशा उसकी जीत होती है।
अगर महिलाएं नेक काम करती है तो उसका फल उनके बच्चों को मिलता है। महिलाएं समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत स्तंभ होती है। परिस्थितियां एक समान नहीं रहती वो बदलते रहती है इसलिए हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।
वैश्विक महामारी कोरोना काल में उन्होंने आवारा पशुओं के लिए स्वयं चावल बना लाती और उनको खिलाई। रिटायर्ड होने बाद सामाजिक कार्यों से जुड़ने की उनकी इच्छा है ताकि जिस सोसायटी ने इतना कुछ मिला है उसे कुछ रिटन किया जा सके। कई छात्र-छात्राओं को जो आर्थिक परेशानियों के कारण स्कूल-कॉलेज नहीं आ पाए उनको हेल्प किया ताकि वो शिक्षित हो सके।


















