खास खबरघर-परिवारफीचर्ड

नाग पंचमी आज: वासुकि नाग को चढ़ाएं ये एक चीज, राहु-केतु दोषों से मुक्ति के लिए बेहद असरदार उपाय

हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. यह पर्व भगवान शिव के प्रिय नाग देवता को समर्पित होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से व्यक्ति को संकटों से मुक्ति मिलती है और कालसर्प समेत कई दोषों का निवारण होता है. इस साल लोगों के मन में नाग पंचमी की सही तारीख को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है. इसी कड़ी में आज हम आपको नाग पंचमी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि बताने जा रहे हैं…

 

 

 

नईदिल्ली (ए)। नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवताओं की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन नाग देवताओं की पूजा करने और भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा है. खासतौर पर वासुकि नाग का धार्मिक महत्व काफी अधिक है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं में उन्हें भगवान शिव के गले का आभूषण बताया गया है. ज्योतिषीय मान्यताओं में नाग पूजा को राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभावों को शांत करने के उपायों से भी जोड़ा जाता है. ऐसे में नाग पंचमी पर किया गया एक खास उपाय भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

नाग पंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. ऐसे में सभी भक्त इस 2 घंटे 37 मिनट की अवधि में नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

वासुकि नाग को क्यों चढ़ाएं शहद?

मान्यता के अनुसार नाग पंचमी पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करते समय शहद अर्पित करना शुभ माना जाता है. शहद को पंचामृत के प्रमुख घटकों में भी शामिल किया जाता है और शिव पूजा में इसका प्रयोग किया जाता है. धार्मिक मान्यता में शहद को मधुरता, शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना गया है।

इसी वजह से नाग पंचमी के दिन वासुकि नाग का स्मरण करते हुए भगवान शिव को शहद अर्पित किया जा सकता है. हालांकि, पूजा में किसी भी वस्तु को सीधे नाग की प्रतिमा या जीवित नाग पर डालने के बजाय मंदिर में स्थापित प्रतिमा पर ही विधिपूर्वक अर्पित करना चाहिए।

राहु-केतु से क्या है संबंध?

वैदिक ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है. कुंडली में इनकी स्थिति को लेकर कई तरह की ज्योतिषीय धारणाएं प्रचलित हैं. नाग पूजा और सर्प संबंधी धार्मिक अनुष्ठानों को भी कई परंपराओं में राहु-केतु की शांति से जोड़ा जाता है. इसी वजह से नाग पंचमी को राहु-केतु से संबंधित दोषों के निवारण के लिए विशेष दिन माना जाता है. हालांकि, इसे ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए. किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु की वास्तविक स्थिति और उसके प्रभाव का आकलन जन्म विवरण के आधार पर किया जाता है।

नीला फूल भी कर सकते हैं अर्पित

नाग पंचमी की पूजा में यदि विशेष पूजा सामग्री उपलब्ध न हो, तो भगवान शिव को नीला फूल अर्पित करने की मान्यता भी कुछ परंपराओं में मिलती है. शिव पूजा में फूल अर्पित करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि फूल स्वच्छ और ताजे हों तथा पूजा की स्थानीय परंपरा के अनुरूप हों. नीले अपराजिता के फूलों को इस दिन शिवलिंग और वासुकि पर चढ़ाने से राहु-केतू के दोष शांत होते हैं और शिव और वासुकि की कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही नाग देवता का ध्यान करते हुए उनके मंत्र का जाप किया जा सकता है. सरल रूप से भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना भी शिव आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

कैसे करें पूजा?

नाग पंचमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें और शिवलिंग पर परंपरा के अनुसार दूध, शहद और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें. वासुकि नाग का ध्यान करते हुए फूल, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें. इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभावों से राहत की प्रार्थना करें. ध्यान रखें कि पूजा में किसी भी जीवित सांप को दूध या शहद पिलाना उचित नहीं है. नाग पंचमी की पूजा नाग देवता की प्रतिमा या चित्र के सामने विधिपूर्वक करना ही सुरक्षित और उचित तरीका है।

नाग पंचमी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता की पूजा से भक्तों को भय, रोग और ज्योतिषीय दोषों से मुक्ति मिलती है. यह पर्व सावन मास में भगवान शिव और उनके गले में विराजमान वासुकी नाग के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है. मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से परिवार की रक्षा होती है और सर्पदंश का भय भी दूर होता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button