नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा करें। देवी का यह स्वरूप गौर वर्ण है यानी महागौरी बहुत गोरी हैं। महागौरी सफेद वस्त्र धारण करती हैं, इसलिए इनकी पूजा में सफेद कपड़े पहनना चाहिए। सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में देवी की पूजा और व्रत करने का संकल्प लें। देवी को नारियल और नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं। पूजा करें और दिनभर व्रत रखें। देवी के मंत्रों का जप करें…
नईदिल्ली (ए)। आज यानी 18 अक्टूबर, रविवार को नवरात्रि का आठवां दिन है. नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी का स्वरूप बेहद उज्ज्वल और दिव्य है. मां का वाहन वृषभ है, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से मां महागौरी की पूजा-अर्चना करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होने लगती हैं. ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के उपवास कर रहे हैं और माता की पूजा करते हैं, तो आज पूजा के दौरान आप यहां से मां महागौरी चालीसा, मां महागौरी की आरती और मंत्र पढ़ सकते हैं।
मां महागौरी का स्वरूप गौर वर्ण का होने के कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है। मां के वस्त्र और आभूषण भी सफेद रंग के हैं। उनकी चार भुजाएं हैं। मां के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू सुशोभित है। वहीं, अन्य दूसरा हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं। मां महागौरी का वाहन वृषभ यानी बैल है, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पूजा विधि:
- नवरात्रि के आठवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां दुर्गा और मां महागौरी का ध्यान करें।
- मां को गंगाजल या स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन और पुष्प चढ़ाएं।
- मां महागौरी को सफेद रंग प्रिय हैं। इसलिए मां को सफेद फूल अर्पित करें।
- इसके बाद मां के सामने धूप और घी का दीपक जलाएं और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- दुर्गा अष्टमी के अवसर पर कई भक्त कन्या पूजन भी करते हैं। ऐसे में श्रद्धा के अनुसार कन्याओं को भोजन कराएं।
- अंत में मां महागौरी की आरती करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां को सफेद मिठाई, खीर, दूध से बनी मिठाइयां और फल भी अर्पित कर सकते हैं। अष्टमी को कन्या पूजन करने वाले जातक हलवा, पूरी और चने का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगा सकते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि तपस्या के दौरान मां पार्वती ने लंबे समय तक कठिन साधना की। धूप, वर्षा और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी वह अपनी साधना में लीन रहीं। कठोर तपस्या के कारण उनका शरीर धूल और मिट्टी से ढक गया तथा उनका वर्ण सांवला पड़ गया।
मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनकी तपस्या स्वीकार की। इसके बाद भगवान शिव ने गंगाजल से मां पार्वती का अभिषेक किया। मान्यता है कि गंगाजल के स्पर्श से मां का शरीर अत्यंत गौर और कांतिमय हो गया। इसी कारण उनका नाम महागौरी पड़ा।
मां महागौरी का स्वरूप पवित्रता, शांति, करुणा और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। वह अपने भक्तों के कष्ट दूर करने वाली और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देने वाली देवी हैं। मां के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में डमरू है। उनके अन्य हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं, जो भक्तों को निर्भयता और आशीर्वाद प्रदान करने का प्रतीक माने जाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। दुर्गा अष्टमी के दिन मां की आराधना के साथ कन्या पूजन करने की भी परंपरा है। भक्त मां से परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।
मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
















