दुर्ग-भिलाई

जघन्य अपराध में शामिल नाबालिग पर ऐडल्ट की तरह केस? प्लानिंग में सरकार…

नई दिल्ली। आने वाले दिनों में जघन्य अपराध में शामिल होने पर नाबालिग पर ऐडल्ट की तरह केस चलाया जा सकता है। इसके लिए सरकार नियमों में बदलाव की प्लानिंग कर रही है। इसमें जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट में बदलाव किए जाएंगे। बदलाव में जघन्य अपराध की श्रेणी को फिर से वर्गीकृत किया जाएगा। गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंत्रियों की बैठक में इसपर चर्चा हुई। बता दें कि लंबे वक्त से सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ आमजन के बीच यह मुद्दा उठता रहा है और कानून में बदलाव की मांग होती रही है।इस मीटिंग में कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, महिला विकास मंत्री स्मृति ईरानी, विदेश मंत्री एस रविशंकर, हरसिमरत सिंह बादल और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन शामिल थे। मंत्रियों की यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद हुई। जनवरी 2020 के उस निर्देश में कोर्ट ने केंद्र से कहा कि जल्द से जल्द जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट 2015 की खामियों को दूर किया जाए।

कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि जो क्राइम रेप, मर्डर या आतंकवाद की श्रेणी में नहीं आते लेकिन उनमें सजा 7 साल या उससे ज्यादा है उनकी श्रेणी तय की जाए। सुझाव दिया गया था कि इन्हें भी गंभीर क्राइम की श्रेणी में रखा जाए। बता दें कि जेजे ऐक्ट 2015 के मुताबिक, ‘जघन्य अपराध’ वे हैं जिसमें कम से कम सजा सात साल है। मीटिंग में इसपर भी चर्चा हुई कि जघन्य अपराधों में नाबालिगों का इस्तेमाल बढ़ गया है।

बता दें कि ऐसे कई मामले सामने आते हैं जब बड़े क्राइम में शामिल शख्स नाबालिग पाया जाता है। ऐसे में कानून के हाथ बंधे रह जाते हैं। निर्भया रेप केस में भी ऐसा हुआ था। सबसे ज्यादा बर्बरता दिखाने वाला शख्स ही नाबालिग पाया गया। फिर बाल सुधार गृह की सजा पूरी होने के बाद उसे छोड़ना पड़ा। ऐसा ही एक मामला हाल में सामने आया। जामिया में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक शख्स ने गोली चला दी। गोली एक छात्र को लग भी गई। बाद में वह शख्स नाबालिग पाया गया। हिंट ऐंड रन के भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें गाड़ी चलानेवाला नाबालिग पाया जाता है।

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